अनुभवी हंस और प्यारा तोता

उस तोते का नाम प्यारा था। जैसा कि उसके मालिक ने रखा था। पर प्यार तो उसके नाम तक ही सीमित रह गया था। उसे अपने मालिक से प्यार जैसी कोई चीज नसीब नहीं होती। वह उसका जरा भी ध्यान नहीं रखता था। ना ही उसे खाने को देता ना ही कुछ पीने को, ऊपर से सारा दिन पिंजरे में कैद, वह अलग। वह तब कुछ ही दिन का था, जब एक शिकारी ने उसे पकड़कर, कुछ पैसों के लिए उसे बेच दिया था। तब से लेकर अबतक, पूरे दो साल हो चुके थे और वह अपने पिंजरे से एक पल के लिए भी बाहर नहीं आ पाया था। जब कभी प्यारा तोता खुले आसमान के नीचे रहता, तो उसकी नजर एकटक आसमान पर गड़ी रहती। जब भी वह आसमान में उड़ते उन आज़ाद पंछियों को देखता, तो उसके आँखों में आँसू आ जाते थें। वह भी आज़ाद होना चाहता था और दूसरे पंछियों की तरह उड़ना चाहता था। पर समस्या यह थी कि वह भला अपने पिंजरे से बाहर आए तो आए कैसे? आजकल इसी चिंता में वह सारा दिन गुजार दिया करता था। अब उसकी सेहत भी खराब होने लगी थी। वह दिन-ब-दिन पतला होता जा रहा था।

एक खास दिन उसके लापरवाह,सुस्त मालिक की नजर उसपर पड़ी। उसने देखा कि उसका तोता पतला और कमजोर हो गया था और उसने पिंजरे का दरवाज़ा खोलकर उसे आज़ाद कर दिया। प्यारा तोता पूरी ताकत लगाकर पिंजरे से बाहर आया और आसमान में उड़ने की कोशिश की। कुछ प्रयासों के बाद वह उड़ने में सफल भी रहा और उसने मन ही मन अपने मालिक को धन्यवाद कहा और सारी ख़ुशियों को अपने हृदय में समेटकर अपने मालिक से बहुत दूर चला गया।

कुछ दिनों तक उसने अपना पूरा समय एक आम के पेड़ पर बिताया और जी भर कर आम खाया। जब उसमें उड़ने की ताकत आ गई, तब उसने यह फैसला किया कि वह अब ऐसी जगह जाएगा, जहाँ ढ़ेर सारे पक्षी रहा करते हों। परंतु समस्या यह थी कि वह यह नहीं जानता था कि वह ऐसा स्थान ढूंढ़ेगा कैसे? और उसे किस दिशा में उड़कर अपनी यात्रा की शुरूआत करनी चाहिए थी?

खैर उसने उस आम के पेड़ से विदा लिया और फिर दक्षिण दिशा की ओर उड़ चला। वह पूरे दो दिनों तक उड़ा और लंबी दूरी तय कर ली। परंतु उसे कोई भी ऐसी जगह नहीं दिखी, जहाँ ढ़ेर सारे पक्षी रहा करते हों। वह थककर उदास मन से एक पेड़ की डाली पर जा बैठा। अगले दिन सूरज निकलने से पूर्व ही वह प्यारा तोता फिर से उड़ा। परंतु इस बार वह पूरब दिशा की ओर उड़ा। प्यारा तोता मन में आस बाँधे उड़ता रहा और इस बार भी वह लंबी दूरी तक उड़ता रहा और फिर पुनः थककर एक पेड़ की डाल पर जा बैठा। उसे इस बार भी निराशा हाथ लगी। उसे ऐसा कोई भी स्थान नजर नहीं आया, जहाँ ढ़ेर सारे पक्षी रहा करते हों। अगले दिन उसे कहीं भी जाने की इच्छा नहीं हुई। इसके बावजूद भी वह उड़ा, परंतु उसने एक बार फिर से अपनी दिशा बदल ली थी। वह पश्चिम की तरफ उड़ा। वह तीन दिन और तीन रातों तक उड़ता रहा, मगर उसे उसका लक्ष्य नहीं मिला। वह थककर एक झील के किनारे एक पेड़ की डाल पर जा बैठा। इसबार तो उसके हौसलों ने भी जवाब दे दिया था। वह इतना मायूस हो गया कि उसके आँखों से आँसू छलक पड़े। वह काफी देर तक उस पेड़ पर बैठा-बैठा रोता रहा। जब रात घिरने को आई, तब-तक उसके आँसू भी सूख चुके थें और उसे एहसास हुआ कि उसे जोरों की प्यास लगी हुई थी। वह उड़कर पास ही मौजूद झील तक गया और पानी पीने लगा। इसी दौरान एक हंस का जोड़ा झील के किनारे तक आया। उनमें से एक हंस बहुत सयाना और बुद्धिमान था। उसे जिंदगी जीने का काफी ज्यादा अनुभव था और उसने पानी पीते प्यारे तोते की सिसकियाँ सुन ली।

वह अनुभवी हंस उसके पास गया और उसने तोते से पूछा ‘क्या बात है भाई, तुम रो क्यों रहे हो?’

प्यारा तोता पहले तो थोड़ा घबराया, परंतु जब उसने हंस के करुणा से भरे चेहरे को देखा, तो वह खुद को रोक नहीं पाया और जोरों से रोने लगा।

‘रो मत बच्चे, बताओ तो आखिर बात क्या है?’ हंस ने पूछा।

प्यारे तोते ने रोते-रोते हंस को सारी बातें बताई। उसकी बात सुनने के बाद हंस के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। उसने बड़े ही विनम्रता से कहा ‘तुम्हें जरा भी चिंतित होने की जरूरत नहीं है। तुम तो बस अपने मार्ग से भटक गए हो।’

‘मार्ग से भटक गया हूँ! यह कैसी बात कर रहे हैं हंस महाराज? मैं भला अपने मार्ग से कैसे भटक सकता हूँ! मुझे तो यह भी ज्ञात नहीं कि मुझे जाना किस दिशा में है।’ प्यारा तोता उलझे हुए मन से बोला।

बुद्धिमान हंस मुस्कुराया और बेहद कोमल स्वर में बोला ‘जब तुम्हें दिशा ज्ञात ना हो और फिर भी तुम अपनी मंज़िल तक पहुँचना चाहते हो, तो तुम्हें अलग-अलग मार्गों पर आगे बढ़ने के बजाय, एक ही मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए। देर-सवेर तुम अपनी मंज़िल पर अवश्य ही पहुँच जाओगे। इसलिए अगर अभी तुम पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहे हो, तो आगे भी तुम्हें बगैर निराश हुए और अपने मन में दूसरा विचार लाए पश्चिम दिशा की ओर ही बढ़ना चाहिए। हो सकता है कि तुम्हें अपनी मंज़िल पाने में समय लगे, मगर ऐसा करने से तुम उसे अवश्य ही पा लोगे। अलग-अलग दिशाओं में हाथ-पैर मारने से कुछ भी हासिल नहीं होगा।’ हंस ने कहा और वहाँ से चला गया।

प्यारे तोते को अपनी गलती का एहसास हो गया था। और अगले दिन जब सूरज निकला, तो वह अपने मन में उत्साह का नया दीपक जलाए पुनः पश्चिम दिशा की ओर ही उड़ा। एक के बाद एक दिन बीतते गए, मगर प्यारे तोते ने तो जैसे तय कर लिया था कि वह सिर्फ और सिर्फ एक ही दिशा में उड़ेगा और अपनी मंज़िल को पाकर ही दम लेगा। फिर क्या था उड़ता-उड़ता वह एक घने जंगल के पास आ पहुँचा और ईश्वर की कृपा से उसे वहाँ ढ़ेर सारे पक्षियों का बसेरा नजर आ गया। वह बहुत खुश हुआ और उसने नम आँखों से उस अनुभवी हंस को याद किया। आखिरकार वह प्यारा तोता अपनी मंज़िल पर पहुँच ही गया।

निष्कर्ष

Moral Story Hindi

कई बार हम लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तो हमें यह ज्ञात नहीं होता कि हम अपने लक्ष्य तक कैसे पहुँचे। फलस्वरूप हम बार-बार आपने लक्ष्य को पाने के तरीके को बदलते रहते हैं और कभी अपने निर्धारित लक्ष्य के पास नहीं पहुँच पाते। इसीलिए यह जरूरी है कि हम कोई एक रास्ता या मार्ग चुने और बगैर अपने मन में दूसरे विचार को जगह दिये, उस मार्ग पर बढ़ते चले। संभव है कि हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने में समय लगे, मगर एक मार्ग पर चलने से हम देर-सवेर अपने लक्ष्य को अवश्य ही पा लेंगे।

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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2 Responses

  1. Anand Singh says:

    ye kahani se kitni achi siksha milti hai nirantar ek he disha mai prayash krte raho lakshay ekdin jarur prarpt hoga

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