खुश रहने का मंत्र

नेक राम बड़े ही भले व्यक्ति थें। वह एक छोटे से परंतु बहुत ही सफल व्यापारी थें। हालाँकि नेक राम से भी सफल व्यापारी उस गाँव में रहा करते थें, परंतु कोई भी ऐसा न था जो नेक राम के भांति जिंदा दिल हो। गाँव के अन्य लोगों की ही तरह मुझमें भी यह जिज्ञासा थी कि मैं यह पता करूँ कि भला नेक राम की जिंदा दिली का राज क्या है। भला क्यों और कैसे वह अपने एक छोटे से व्यापार से इतने खुश रह लिया करते थें?

खैर, मैं अपनी इसी जिज्ञासा को मिटाने के लिए एक दिन नेक राम के पास पहुँचा। और उनसे पूछ ही बैठा- “आप इतने खुश कैसे रह लिया करते हैं? जबकि आपके पास एक छोटी सी दुकान है और मैंने देखा है कि कभी-कभी तो आपके दुकान से कोई बिक्री भी नहीं हो पाती है। इसके बावजूद भी आप हमेशा खुश नजर आते हैं। मुझे भी इसका कारण जानना है। क्या आप मुझे बताएँगे?”

नेक राम पहले तो थोड़ा मुस्कुराए और फिर बोले “ठीक है, मैं तुम्हें जरूर बताऊँगा। पर इसके लिए तुम्हें दो दिनों तक मेरे साथ रहना होगा और जैसा मैं करूँ तुम्हें भी वैसा ही करना होगा।”

मैंने कहा ‘क्यों नहीं। मैं तैयार हूँ। आप बताइए मुझे क्या करना होगा।’

‘ठीक है, आज रात तुम भोजन करने के बाद मेरे घर आ जाना और मेरे घर पर ही सोना। ताकि सुबह होते के साथ ही तुम देख सकोगे कि मैं खुश रहने के लिए क्या करता हूँ।’

मैंने वैसा ही किया जैसा कि नेक राम ने मुझसे कहा था। मैं उस रात नेक राम के यहाँ ही ठहरा। और जब सुबह हुई तो मैंने नेक राम के घर के आँगन में बाल्टी के रखे जाने की आवाज़ सुनी। नेक राम जग चुके थें। उस वक्त सुबह के छह बज रहे थें। मैं कमरे से बाहर आया, तो मैंने देखा कि नेक राम आँगन में लगे फूलों को पानी दे रहे थें। उन्होंने मुझे भी फूलों में पानी देने को कहा। फूलों में पानी देने के बाद वह सुबह के नित्यक्रिया से मुक्त होकर स्नान करने चल पड़े। इसके बाद भगवान की पूजा की और सुबह का नाश्ता खत्म करने के बाद, अपनी पत्नी के हाथों से टिफिन लेकर दुकान की ओर चल पड़े। उन्होंने दुकान खोला, अंदर रखी चीजों को साफ किया फिर भगवान की पूजा की और दुकान संभालने बैठ गए। जब दिन के दो बजे, तो उन्होंने अपना टिफिन निकाला और भोजन करके पुनः दुकान संभालने बैठ गए। पूरे दिन गिने चुने लोग ही उनके दुकान से खरीददारी करने आए। फिर जब सूरज ढला और रात घिर आई, तो उन्होंने दुकान बंद की और अपने घर की ओर रवाना हो गए। घर पहुँचकर उन्होंने कपड़े-लते बदलकर, फिर से फूलों को पानी दिया और दुकान का हिसाब-किताब लेकर बैठ गए। जिसमें उन्हें दस से पंद्रह मिनट ही लगे। फिर उन्होंने रात्रि का भोजन किया और थोड़ा टहलने के बाद सोने चले गए।

अगले दिन भी नेक राम का दिनचर्या बिल्कुल एक जैसा ही रहा। और तब मुझे नेक राम के हमेशा खुश रहने का राज पता चला। ऐसा नहीं था कि वे बहुत ज्यादा मेहनत करते थें। परंतु वह हर रोज थोड़ा-थोड़ा काम करके अपनी मेहनत को कम जरूर कर दिया करते थें। सबसे जरूरी बात जो मैंने उनसे सीखी कि वे अपना थोड़ा भी समय नष्ट नहीं करते थें। वह पूरे दिन खुद को व्यस्त रखते थें। जब मैंने उनसे यह बात कही, तब उन्होंने मुझसे कहा-

Moral Story Hindi

“यह कथन बिल्कुल सही है कि खाली दिमाग शैतान का होता है। खाली बैठे रहने से और समय बर्बाद करने से हमें कुछ भी हासिल नहीं होता। खाली बैठे रहने से इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि हमारा दिमाग गलत चीजों को सोचने और समझने लगे। इस बात को समझना बहुत जरूरी है कि हमारा दिमाग नकारात्मक सोच को बड़ी तेजी के साथ अवशोषित करता है। जिसका असर हमारे दूसरे कामों और हमारी ख़ुशियों पर भी पड़ता है। इसलिए हमें खुद को व्यस्त रखना चाहिए, जिससे हमारा दिमाग नकारात्मक विचारों की तरफ कम जाए या फिर उस हद तक ही जा पाए, जिसे हम आसानी से संभाल सके। और तब जाकर हम खुश रह सकते हैं। व्यस्त रहो और मस्त रहो।”

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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