1.रहस्यमयी पड़ोसी

गरमी के मौसम में पहली बार उस घटना की शुरूआत हुई, जो मैं आपलोगों को बताने जा रहा हूँ। मेरा नाम भावेश रालोसकर है। मैं भी अब-तक एक ऐसे विचार को मानने वालों में से था, जहाँ भूतों और प्रेतों की कोई जगह नहीं होती। ऐसी कोई ऊर्जा नहीं होती, यह बात मैं अपने 34 साल के अनुभवों से, दावे के साथ कह सकता था। हाँ मगर मैं इस बात से इनकार नहीं करना चाहूँगा कि उन काल्पनिक भूतों, प्रेतों और चुड़ैलों का डर, मेरे मन के किसी कोने में बना हुआ था, जो कि एकांत अंधेरों में मुझे झकझोर कर रख दिया करता था। फिर भी मैं जानता था, सुबह की पहली किरण के साथ अंधेरा छट जाने वाला है और साथ ही मेरा वह डर भी पांव समेटे घने अंधेरों में खो जाने वाला है। वैसे भी मुझे इस स्थिति का यदा-कदा ही सामना करना पड़ता था। क्योंकि मेरी पत्नी (शोभा) बहुत कम अपने मायके जाया करती थी। मेरा एक बेटा (कौशल) भी है। वह तब एक साल और दो महीने का था। उसने कुछ ही समय पहले अपने दोनों पैरों पर चलना सीखा था। मेरा घर इमारत के “बी” विंग में, पहली मंज़िल पर स्थित था। मुझे नहीं मालूम क्यों, मगर इमारत के इस भाग में बहुत कम लोग रहा करते थे। जब मैं दो साल पहले मकान खरीदने यहाँ आया तब मुझे एक अजीब से इंसान ने, सिवाए “बी” विंग के इमारत के सभी विंगो में घर दिखाया। फिर मेरी ज़िद पर मुझे “बी” विंग ले जाया गया। सभी मकान एक जैसे ही थे। इसके बावजूद इस विंग के सभी घर अन्य विंगो से काफी सस्ते थे। इमारत की मज़बूती पर भी सवाल उठाना कहीं से जायज़ नहीं लगता था। इसलिए मैंने यही “बी” विंग के पहली मंज़िल पर रहने का फैसला किया।

हमें यहाँ आए दो साल हो चुके है। अब तक हमारी ज़िंदगी छोटी-छोटी ख़ुशियों और छोटी-मोटी परेशानियों के साथ बीत रही थी। कुल मिलाकर देखा जाए तो सब कुछ अच्छा चल रहा था और बेवजह के रहस्यों से हमारा कोई लेना-देना नहीं था।

फिर कुछ अनपेक्षित हुआ-

सुबह के साढ़े-सात बजे थे। मैं अखबार पढ़ने मे व्यस्त था और शोभा मेरे सामने बैठी सब्जियां काट रही थी। कौशल जिसे चलना सीखे हुए महज कुछ ही दिन हुए थे, वह लगातार उस छोटे से स्वागत कक्ष में चलता ही जा रहा था। मेरी एक नजर अखबार पर टिकी थी, तो दूसरी अपने बेटे पर। उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उसके छोटे-छोटे पांव ने अभी थकना नहीं सीखा था।

वैसे सच कहा जाए तो हर परिवार के पास एक या दो ऐसे किस्से होते हैं, जिनके विषय में बात करके, आप अपने उबाऊ दिन को थोड़ा मनोरंजक बना सकते है। वह बात कुछ भी हो सकती है और हमारे मामले में वह किस्सा अपने पड़ोसी से जुड़ा था, जो कि पहली मंज़िल पर ही हमसे सटे हुए मकान में रहा करते थे। इतने करीब रहते हुए भी हम उन लोगों के विषय में बहुत थोड़ा ही जानते थे। बहुत थोड़े से मेरा मतलब है कि उनके मुख्य दरवाज़े पर लगे नामपट्ट के अलावा और कुछ भी नहीं। जिसपर लिखा था “बैनी सारस”। जहाँ तक मेरा अनुमान है, इस इमारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति हमारे पड़ोसी के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। एक रोज़ जब मैं दफ्तर से लौटा, तो अपनी मन की शांति के लिए, मैं अपने अजीब पड़ोसी के सिलसिले में चौकीदार से जानकारी हासिल करने की कोशिश करने लगा। वह इमारत में काम करने वाला इकलौता चौकीदार था। उसकी उम्र यही कोई बीस-बाईस साल की होगी। उसे भी यहाँ आए हुए तीन साल ही हुए थे। जैसा उसने मुझे बताया। इससे पहले उसके पिता यहाँ चौकीदार की नौकरी करते थे और उन्होंने ही उसे बताया था कि हमारे पड़ोसी, इस इमारत के निर्माण खत्म होने के साथ ही यहाँ रहने लगे थे। यही कोई तीस साल पहले। फिर कुछ सालों बाद अन्य लोग भी यहाँ आकर रहने लगे। कोई नहीं जानता क्यों, मगर धीरे-धीरे “बी” विंग के सभी लोग अपने घरों को सस्ते दामों में बेच कर चले गए। कोई रह गया तो वे थें हमारे पड़ोसी। चौकीदार ने बताया कि हमारे ही विंग में तेरहवीं मंज़िल पर रहने वाली मिस जूना वारिच भी लगभग पच्चीस सालों से यहाँ रह रही हैं। मगर वह सारस परिवार के सदस्यों की तरह जरा भी अजीब नहीं हैं। वह मिलनसार और समाजिक औरत है।

खैर मैं और मेरी पत्नी इसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, जब मेरी नज़र घड़ी पर गई। मैं फौरन उठा और स्नान घर की ओर चल पड़ा। बातचीत में मुझे जरा भी ख्याल ना रहा कि कब घड़ी के कांटे, साढ़े सात बजे का आंकड़ा पार करके नौ पर जा पहुँचे थे। मुझे दफ्तर के लिए देर हो चुकी थी।

महज आधे घंटे के भीतर मैं घर से तैयार होकर बेस्मन्ट में पहुँचा। नाश्ता करने का वक्त नहीं था और ना ही अब मुझे अपने पड़ोसी याद थे। फिलहाल मेरा सारा ध्यान अपनी गाड़ी तक पहुँचने में लगा हुआ था। तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे दफ्तर पहुँचने की जल्दबाज़ी पर विराम लगा दिया। मैंने एक आवाज़ सुनी। जो किसी औरत की थी। इन दो सालों में मैंने पहली बार किसी को बेस्मन्ट में बोलते हुए सुना था। चौकीदार और सफाई वाले की बात ना करें, तो “बी” विंग के इस बेस्मन्ट में शायद ही कोई आता-जाता था। मैं एक पल के लिए ठहरा और आवाज़ सुनने की कोशिश की।

‘मैं कोशिश कर रही हूँ, थोड़ा समय और लगेगा।’ उस औरत ने कहा।

आवाज़ में डर और गुस्सा दोनों साफ-साफ झलक रहे थे। मैं फ़ौरन बेस्मन्ट में बने एक छोटे से कमरे की ओर बढ़ा, क्योंकि आवाज़ वहीं से आ रही थी। अचानक ही मेरा पूरा शरीर भय से कांप उठा और मेरा दिल न जाने क्यों जोरों से धड़कने लगा। यह वैसी ही अनुभूति थी, जो मैं अंधेरे में अकेले रहने पर महसूस करता हूँ।

असल में यह सब उस डरावने गुर्राने जैसी आवाज़ को सुनकर हुआ था। वहाँ कोई और भी था। क्योंकि मैं उसके साये को देख पा रहा था। मैं डर की वजह से इस बात पर गौर न कर सका कि भला कैसे कोई अंधेरी जगह पर किसी साये को देख सकता था। पर जो भी था वह काला और किसी साये की ही तरह लंबा था। खैर, उस दूसरी आवाज़ में गुर्राने के साथ-साथ कुछ कहा भी गया था, जो उस वक्त मैं नहीं समझ पाया था। पर इतना स्पष्ट था कि वह भयानक साए जैसा दिखने वाला शख़्स, उस महिला को धमकियाँ दे रहा था। मैं एक और कदम आगे रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और अपनी गाड़ी वहीं छोड़कर, उल्टे पांव पूरी तेजी के साथ वहाँ से लौट गया। मैं नहीं चाहता था कि अंदर जो कोई भी था, उसे मेरे वहाँ होने की भनक भी लगे। खैर बेस्मन्ट से बाहर आकर मुझे थोड़ा अच्छा महसूस हो रहा था। परंतु वह खौफनाक गुर्राहट अब भी मेरे कानों में गूँज रही थी। मैं पूरे रास्ते यही सोचता रहा कि आखिर उसने कहा क्या था? मैंने कई बातों को उस आवाज़ से जोड़कर देखने की कोशिश की और जो बात मुझे सबसे ज्यादा सटीक लगी, वह यह थी कि ‘दो साल लंबा वक्त होता है, अब मुझे ही कुछ करना होगा’। वे किसकी बात कर रहे थें और क्या करना चाहते थे, मुझे इसका जरा भी अंदाजा नहीं था। वैसे इस घटना ने मेरे मन की शंका अवश्य बढ़ा दी थी।

तकरीबन बारह बजे के आस-पास मैं दफ्तर पहुँचा। काफी सारा काम, मेरे मेज पर पहले से ही रखा जा चुका था। उसे पूरा करने और समय पर अपने घर पहुँचने की इच्छा में, मैं जल्दी ही आज सुबह हुई घटना को भूल गया। शाम को दफ्तर से लौटते वक्त मुझे एक बार फिर उन बातों का ख्याल आया। शायद मैं बेवजह ही परेशान हो रहा था। उन बातों से मेरा क्या लेना-देना था। मैं बस पर चढ़ा, जो मुझे 40 मिनट के भीतर मेरे घर के सबसे करीबी बस स्टैंड तक ले आया और मैं जल्द ही अपने घर पहुँच गया।

रात के भोजन के बाद, तकरीबन ग्यारह बजे मैं टीवी देखने स्वागत कक्ष में गया। शोभा और कौशल पहले ही सोने जा चुके थे। इस वक्त “बी” विंग में हमेशा की तरह बेहद शांति थी।

और तभी-

धड़ाम, धड़ाम की दो आवाज़ें आई और फिर किसी के रोने की। मैं दौड़कर अपने कमरे में गया। शोभा और कौशल गहरी नींद में थे। मैं वापिस स्वागत कक्ष में लौटा, जब वह पूरा कमरा क्षण भर के लिए, आँखों को चौंधिया देने वाले प्रकाश में रोशन होकर अंधेरे में विलीन हो गया। बिजली जा चुकी थी। मैं कुछ पल वही चुपचाप खड़ा रहा। रह-रहकर रोने और बिलखने की आवाज़ें मेरे कानों में पड़ती रही और फिर अगले ही पल वहाँ सन्नाटा पसर जाया करता। थोड़ी-थोड़ी देर पर ऐसा होना जारी रहा। अगर मैं आपको ठीक-ठीक समझाने की कोशिश करूँ, तो इन आवाज़ों को सुनकर ऐसा प्रतीत होता था, जैसे किसी को डराया जा रहा हो, जिससे उसकी चीख निकल पड़ती और डराना बंद करते ही, उसकी आवाज़ खौफ़ के मारे गले में ही अटक जाया करती। मैं गलत नहीं था, तो यह सब कुछ हमारे पड़ोसी के घर हो रहा था।

मैंने बिना किसी आवाज़ के घर के मुख्य दरवाज़े को खोला और अंधेरे गलियारे में दो-चार कदम चलते हुए, अपने पड़ोसी के घर के सामने आ खड़ा हुआ। इन दो सालों में, मैं पहली बार उनके घर के इतने करीब आया था। अब-तक अंधेरे का डर मुझ पर हावी हो चुका था। पर मैं हिम्मत बांधे वहाँ खड़ा रहा और दरवाज़े में लगे ताले की छेद से, अंदर देखने का प्रयास करने लगा। घने अंधेरे में जरा सी चाँद की रोशनी, कमरे में मौजूद थी। और मैं जितना देख पाया, वह दृश्य किसी को भी विस्मित कर सकता था। एक बारह साल का लड़का ज़मीन पर औंधे मुंह गिरा पड़ा था। कुछ-कुछ इस तरह मानो उसे ज़ोर से उछाल कर फेंका गया हो। एक जवान औरत जो कि उस लड़के की माँ लगती थी, उसके सामने दीवार पर पीठ सटाए बैठी कांप रही थी। फिर मेरी नजर उस बूढ़ी औरत पर गई और मैं झट से समझ गया कि वह मिसेज सारस होंगी, जिनका दरवाज़े के नामपट्ट पर नाम लिखा हुआ था। बैनी सारस

मैं एक पल के लिए अपने माथे पर आए पसीने को पोछने के लिए उठा और दोबारा दरवाज़े की छेद से अंदर देखने लगा। मेरी नजर पुनः मिसेज बैनी सारस पर पड़ी और मैं अपनी जगह पर इस तरह से जम गया, मानो मुझे वशीभूत कर वहीं खड़ा कर दिया गया हो। मैंने देखा कि मिसेज बैनी सारस, वही एक कोने में बैठी दरवाज़े को निहार रही थी। मुझे ऐसी अनुभूति हुई कि उन्हें मेरी मौजूदगी का एहसास था। वह बगैर पलकें झपकाए मेरी तरफ देखती रही और मैं भी किसी मूर्ति की तरह वहीं खड़ा रह गया।

फिर एक ठंडी, धीमी, रूखी परंतु बेहद शक्तिशाली आवाज़ मेरे कानों में पड़ी। जिसने मुझ पर भय की ऐसी वर्षा की कि मैं बुरी तरह से कांप उठा। यह वही आवाज़ थी, जो मैंने बेस्मन्ट में सुनी थी।

उसने कहा, ‘बहुत थोड़ा समय बचा है, तुम तीनों के पास। एक आखरी मौका देती हूँ। वे पिछले दो सालों से यहाँ रह रहे हैं, फिर भी तुम बदजातों ने मेरा उन तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं निकाला। तुम लोगों को जल्दी ही कुछ करना होगा, वरना एक और हत्या होगी।’

‘हत्या होगी!’ मेरे पास जो थोड़ी सी सोचने की शक्ति बची थी, मैं उसी के बलबूते बड़बड़ाया। पहले तो मुझे लगा कि कोई माफ़िया वाले या फिर कोई बहुत ही बुरा इंसान उनके घर घुस आया था। और मुझे फौरन पुलिस को सूचित कर देना चाहिए। पर मेरा यह भ्रम अगले ही पल टूट गया। जब मैंने एक काले साए जैसी किसी चीज को हवा में लहराते और फिर उस बच्चे को अपने गिरफ्त में लेते देखा। मैं उसका चेहरा नहीं देख पाया, पर जो कुछ भी देखा, उससे मुझे चक्कर आने लगा था। बच्चा जो औंधे मुँह ज़मीन पर गिरा हुआ था, खुद ब खुद ऐसे खड़ा हुआ, मानो उसे किसी अदृश्य रस्सी से ऊपर खींचा गया हो। शायद मैंने जरूरत से ज्यादा देख लिया था। मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया और आगे जो हुआ मुझे जरा भी याद नहीं। अगली आवाज़ जो मेरे कानों में पड़ी, वह शोभा की थी।

उठिए, दफ्तर नहीं जाना क्या?

मैं थोड़ी देर और सोना चाहता था। दर्द से मेरा सिर फटा जा रहा था। एक या दो बार मैंने आँखें खोलने की कोशिश की, पर सब कुछ धुंधला और अंधेरे में समाया हुआ प्रतीत हो रहा था। सांसे अस्थिर होकर चल रही थीं।

‘उठो भी वरना दफ्तर के लिए आज भी देर हो जाएगी।’

मैंने कुछ भी न कहा और चुपचाप सोफे पर से उठा और शोभा को बिल्कुल ही अनदेखा करते हुए, स्नान घर की ओर बढ़ गया। तब मुझे धीरे-धीरे पिछली रात की घटनाएँ याद आने लगी। मैं फौरन स्नान घर से बाहर आया और हैरान होकर बोला ‘कल रात मैं कमरे में सोने कब आया?’

‘कल तुम कमरे में सोए ही कहाँ थे। तुम तो स्वागत कक्ष में बड़े आराम से पसरे हुए थे।’ शोभा ने उत्तर दिया।

‘पर मैं तो बैनी सारस….’ , मैंने अपने शब्दों को बीच में रोक लिया।

‘बैनी सारस क्या?’ शोभा ने चूल्हे की आंच को कम करते हुए पूछा।

‘कुछ नहीं, शायद मैंने कोई सपना देखा होगा। भयानक सपना।’ मैं बुदबुदाया और रसोईघर से बाहर निकलने लगा।

तब शोभा ने मुझे रोका और गुस्से में बोली ‘पहले बताओ कि आज सुबह जब तुम सो कर उठे, तब तुमने मुझे अनदेखा क्यों कर दिया। जैसे मैं वहाँ पर थी ही नहीं!’

‘शायद मैं नींद में था इसलिए।’ मैंने कहा।

मुझे उस काले साए और मिसेज बैनी सारस के घर में हुई घटना को भूलने में परेशानी हो रही थी। अगर मैंने वास्तव में कोई सपना देखा था, तो यह सच में, मेरे अब-तक देखे गए सपनों में सबसे अलग और विचित्र था। क्योंकि इसके दृश्य इतने स्पष्ट थें कि सपने और हकीकत में फर्क कर पाना भी मुश्किल हो गया था। “वे पिछले दो सालों से यहाँ रह रहे है, फिर भी तुम बदजातों ने मेरा उन तक पहुँचने का कोई रास्ता नहीं निकाला। तुमलोगों को जल्दी ही कुछ करना होगा, वरना एक और हत्या होगी।” इन वाक्यों को याद करने पर ऐसा लगता जैसे मेरी ही बात हो रही हो।

खैर, नाश्ता कर, मैंने शोभा और कौशल से विदा लिया और बिल्कुल समय पर दफ्तर के लिए निकल पड़ा। जब मैं बेस्मन्ट में अपनी गाड़ी बाहर निकाल रहा था, तब मुझे वहाँ तेरहवीं मंज़िल पर रहने वाली मिसेज जूना वारिच नजर आई। वे कूड़ेदान में कचरे का बैग डाल रही थीं। वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई, बदले में मैंने भी ऐसा ही किया और दफ्तर के लिए निकल पड़ा।

छिटपुट बारिश से मौसम ठंडा और सुहावना बना हुआ था। पर मेरे नीरस और थके हुए मन का जी ना ललचा। मैं तो बेमन गाड़ी चलाते हुए दफ्तर पहुँचा और जैसे-तैसे पूरे दिन का काम खत्म करके, घर लौट पड़ा। अब बारिश तेज हो चुकी थी और रात भी अन्य रातों से ज्यादा घनी थी। मुझे यह समझने में थोड़ा वक्त लगा कि मैं पिछले दो घंटों से गाड़ी चला रहा था और अब-तक अपने घर नहीं पहुँचा था, जो कि मेरे दफ्तर से 45 मिनट की दूरी पर था। फिर यह समझने में कुछ और वक्त लग गया कि मैं रास्ता भटक चुका था। पर यह कैसे हुआ? मैं तो इन रास्तों को इतनी अच्छी तरह से पहचानता हूँ कि आँखें बंद करके भी अपने घर पहुँच जाऊँ। फिलहाल स्थिति यह थी कि मैं एक सुनसान अजनबी रास्ते पर खड़ा था और मेरे दोनों तरफ फसले लहलहा रहीं थीं। तेज बारिश से मिट्टी की खुशबू पूरे वातावरण में फैली हुई थी। मुझे एक पल के लिए ऐसा लगा, जैसे मैं अपने गांव के खेतों में पगडंडियों पर चल रहा हूँ। मगर जल्द ही मेरी स्थिति ने मुझे वास्तविकता में ला खड़ा किया। मैंने वापिस लौटने के लिए गाड़ी मोड़ी, तभी मेरे पीछे बिजली का एक भयंकर विस्फोट हुआ और आस-पास का इलाका सफेद और हल्के नारंगी रंग से जगमगा उठा। मैंने मुड़कर देखा तो उन चमकती रोशनियों के बीच से कोई भागता हुआ मेरी तरफ आ रहा था। वह अपने एक हाथ से छाते को संभालते हुए और कंधे पर थैला लटकाए, बूढ़ों की तरह दौड़ रहा था। उसके थोड़ा और करीब आ जाने पर मुझे पता चला कि वह एक वृद्ध महिला थी। एक भाग्यशाली वृद्ध महिला, जिसकी जान जाते-जाते बची थी। मैं उसकी मदद तो कर ही सकता था। भला वह मेरा क्या बुरा कर सकती थी। ना तो वह मुझे और ना ही मेरी गाड़ी को लूटकर भाग सकती थी। यदि उसने ऐसा किया भी, तो मैं उसका सामना बड़ी आसानी से कर लेता। मैं वहीं रूक कर उसके अपने समीप आ जाने तक की प्रतीक्षा करने लगा। पर वह महिला दौड़ती हुई, मुझसे आगे निकल गई। शायद उसे मेरी मदद की आवश्यकता नहीं थी। फिर भी वह इस सुनसान सड़क पर कितनी देर तक दौड़ पाती। मैंने अपनी गाड़ी चालू की और उसके पास पहुँचकर आवाज़ लगाई। वह रूकी और फौरन रास्ते से हटकर खड़ी हो गई।

मैंने कहा, ‘अगर आप चाहे तो अंदर आकर बैठ सकती हैं। मैं आपको आपके घर छोड़ दूँगा।’

‘क्या तुम मुझसे कह रहे हो?’ बूढ़ी महिला ने पूछा।

‘तो यहाँ आपके अलावा और है भी कौन?’ मैं बोला।

मेरी बात सुनकर वह महिला थोड़ी देर तक यूँ ही खामोश खड़ी रही। फिर तेज हवाओं में अपने छाते को मज़बूती से पकड़े हुए वह मेरे करीब आकर रूखे अंदाज़ में बोली, ‘मेरे अलावा यहाँ तुम हो बच्चे।’

मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा। जी नहीं हरगिज़ नहीं। जब वह महिला गाड़ी के पास आई, तब मैं पहली बार उनके चेहरे को देख पाया। उनकी उम्र सत्तर वर्ष या फिर उससे थोड़ी ज्यादा की रही होगी। फिर भी उनके चेहरे का तेज ऐसा अतुल्य और मोहक था, जिसने उनके झुर्रियों को भी लगभग समाप्त कर दिया था। बाल सफेद थें, पर उन्हें सफेद कहना भी उचित नहीं था। उनका रंग तो चाँदी जैसा था। शरीर पतला मगर उनके उम्र के हिसाब से अति बलशाली प्रतीत होता था। फिर मेरी नजर उनके पोशाक पर गई, जो कि उनके छाते की ही तरह अजीब थी। वह एक काले रंग का चोगा था, जिसने उनके पूरे शरीर को ढ़क रखा था। उनकी टोपी लंबी और ऊपर से नुकीली थी। उनके नाखून लंबे और काले थें, जो कि उनकी सफेद त्वचा से जरा भी मेल नहीं खाते थें। मैं तो बस यही देखता रह गया। फिर उस महिला ने चुटकी बजाकर मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा और कहा ‘कहाँ खो गए बच्चे?’

‘जी मैं आपसे ही कह रहा था।’ मैं अपने पहले कही बात को सुधारते हुए बोला।

‘क्या तुम अपनी मर्ज़ी से मेरी मदद करना चाहते हो?’ महिला ने पूछा।

‘जी हाँ।’ मैंने विनम्रता के साथ कहा।

‘तो फिर ठीक है, मैं तुम्हारी मदद स्वीकार करती हूँ।’ यह कहकर वह महिला गाड़ी के अंदर बैठ गई। मैंने गाड़ी चालू की और आगे बढ़ चला।

‘आप यहाँ क्या कर रही थी?’ मैंने पूछा।

‘एक बात सुन लो लड़के मुझसे ज्यादा प्रश्न न पूछना।’ उन्होनें कहा और खिड़की से बाहर देखने लगी।

उनकी बात सुनकर मैं स्तब्ध रह गया और चुपचाप गाड़ी चलाने लगा। तकरीबन घंटे भर बाद हम मुख्य सड़क पर पहुँचे। मैं अब भी हैरत में था कि आखिर मैं कैसे इतनी दूर आ पहुँचा था।

‘तुम मुझे यहीं छोड़ दो।’ महिला ने मुझसे कहा।

‘आप फिर कहाँ जाएंगी?’ मैंने पूछा।

‘बारिश बंद हो चुकी है, मैं चली जाऊंगी।’ उन्होंने कहा।

‘परंतु कहाँ? आप मुझे बता दें, मैं आपको छोड़ दूँगा।’

महिला ने कुछ भी न कहा और पुनः खिड़की से बाहर देखने लगी।

मैं समझ गया था कि उनके पास सिर छुपाने का कोई भी आसरा नहीं था और उनके आत्मसम्मान को कोई ठेस न पहुँचे इस वजह से वह मुझसे मदद मांगने से भी कतरा रही थीं।

‘आप चाहे तो मैं आपको ऐसी जगह छोड़ सकता हूँ, जहाँ आप जब-तक चाहे रह सकती हैं और उसके पैसे भी नहीं लगेंगे।’ मैंने कहा।

‘शुक्रिया लड़के। लेकिन मुझे उसकी जरूरत नहीं है। अब तुम मुझे यहीं छोड़ दो और अपने घर चले जाओ।’ महिला ने कहा।

खैर मैं उन्हें वहीं छोड़कर आगे बढ़ चला। मैं पूरे रास्ते उनके विषय में ही सोचता रहा। वह एक सख्त महिला थीं, पर उनका हृदय कोमल था। उन्होंने मुझे अपना नाम एर टोलस्काइ बताया। कोई आश्चर्य की बात न थी कि उनका नाम उनकी वेष-भूषा की ही तरह अनोखा था।

उस दिन मुझे घर पहुँचने में तकरीबन ग्यारह बज गए। जब शोभा ने दरवाज़ा खोला और मुझे खड़ी-खोटी सुनाने लगी।

‘मैं आपको कब से फोन कर रही थी। पर आपका नंबर नहीं लग रहा था। आपको पता है कि मैं पूरे दिन कितनी परेशान रही हूँ।’

‘मगर क्यों?’ मैंने गंभीरता से पूछा।

‘पता नहीं कैसे घर के सारे बल्ब फ्यूज हो गए थें। आप नहीं जानते कि आज मुझे कौशल को लेकर कितनी भाग-दौड़ करनी पड़ी है।’ शोभा ने कहा। ‘बिजली मिस्त्री ने बताया कि ऊँचे विद्युत दाब के कारण हमारे घर में बिजली से चलने वाली सभी चीज़े खराब हो गईं हैं।’

‘पर यह कैसे संभव है?’ मैं पिछले रात के सपने को याद करते हुए बड़बड़ाया। मैंने घबराहट को अपने चेहरे पर आने से रोका और कहा ‘अच्छा होगा कि मैं कल दफ्तर न जाकर इसे ठीक करवा लूं।’

रात को मेरी भोजन करने की इच्छा नहीं हुई और ना ही शोभा ने कुछ खाया। मोमबत्तियों के बुझने के साथ ही पूरा घर अंधकारमय हो गया और मैं बिस्तर पर लेटा-लेटा पिछली रात हुई घटना के बारे में काफी देर तक सोचता रहा। इसी दौरान मेरी नजर खिड़की के पास लगे पर्दे पर गई और मेरे भीतर दहशत के बादल उमड़ पड़े। दरअसल बात यह थी कि पर्दों के बीच से मुझे दो चमकती हुई आँखें नजर आईं। मैं तो बस एकटक उसे देखता ही रह गया। कई बार मुझे उन आँखों के समीप जाने का ख्याल आया, पर हर बार मेरी हिम्मत जवाब दे जाती। मेरे साथ ऐसा पहले भी चुका था। जब अंधेरे में मुझे किसी साये के मौजूद होने की अनुभूति होती और मैं रात भर सो नहीं पाता था। परंतु सुबह होने पर जब मैं उस जगह को देखता तो मुझे वहाँ कपड़े टंगे हुए नजर आते या फिर कोई अन्य वस्तु नजर आती। जो रात में किसी डरावने प्रतिबिंब की तरह प्रतीत होता था। खैर एक अच्छी बात यह रही कि उन अनुभवों से मेरा डर काफी हद तक कम हो गया था, जिससे मुझे नींद आ गई।

समय का पता नहीं क्योंकि मैं उस वक्त गहरी नींद में था, जब मेरे पास सो रहा कौशल जोरों से रोने लगा। मैंने देखा शोभा बिस्तर पर नहीं थी और बाहर थोड़ी बहुत रोशनी हो चुकी थी। इस दौरान कौशल का रोना जारी रहा। मैंने शोभा को आवाज़ लगाई और फिर से आँखें बंद कर सो गया। अगले ही पल मैंने अपने ऊपर भारी दबाव महसूस किया। शायद यह शोभा थी। उसने कौशल को उठाया और वह जल्द ही शांत हो गया। फिर एक अजीब सी आवाज़ मैंने सुनी। शोभा कुछ बोल रही थी। मैं अब भी आधी नींद में था।

शोभा ने कहा, ‘दो सालों तक मैं रूकी रही कि जाने कब तुम मुझे अपने घर में आने दोगे और कब मैं तुमलोगों से मिल पाऊँगी। इस घर में तुम मेरे पहले दोस्त बनोगे। तुम्हें अपने पिता का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिनके बदौलत मुझे तुम्हारे घर में प्रवेश करने का मार्ग मिल सका। वैसे तुम अपने पिता से ज्यादा बहादुर हो। कम से कम तुम मुझे देखकर रो तो नहीं रहे और न ही बेहोश हुए हो। तुम्हारे पिता तो मुझे देखकर बेहोश हो गए थें। चलो यह भी अच्छा ही हुआ। क्योंकि इसी बहाने तुम्हारे पड़ोसी इस घर में दाखिल हो पाए और उन सभी पवित्र सुरक्षा घेरों को मिटा दिया, जो मुझे अब-तक इस घर में प्रवेश करने से रोक रही थीं। खैर अब मैं आ चुकी हूँ। मैं यहीं तुम्हारे साथ रहने वाली हूँ। तुम्हारी जिंदगी से छोटी-बड़ी सभी ख़ुशियों को मिटाकर, तुमलोगों को रोते, तड़पते और डरते हुए देखूँगी और जब तुम्हारी जिंदगी में कुछ भी नहीं बचेगा, तब समझ लेना कि मेरा काम खत्म हो चुका होगा और फिर मैं तुम तीनों को मार डालूंगी। तुम गिर कर मरोगे, तुम्हारे पिता डरकर मरेंगे और तुम्हारी माँ पागल होकर। जैसा कि अब तुम्हारे पड़ोसी के साथ होने वाला है। मैं जानती हूँ कि तुम मेरी बातें सुन रहे हो। मैं वही हूँ जिसे कल तुमने पर्दे के पीछे देखा था। क्या तुम अंधेरों से डरते हो?’

मैंने फौरन अपनी आँखें खोली और पीछे मुड़कर देखा। कमरे में लगे दोलन कुर्सी पर कौशल लेटा हुआ था और वह बुरी तरह से हिल रहा था। पर वहाँ और कोई भी न था। मैंने दौड़कर कौशल को अपनी गोद में उठाया और बेचैन नज़रों से कमरे में इधर-उधर देखने लगा। तभी मुख्य दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आई। मैं फौरन स्वागत कक्ष में गया। दरवाज़े पर शोभा खड़ी थी।

‘तुम कहाँ से आ रही हो?’ मैंने पूछा।

‘सफाई वाला काफी दिनों से नहीं आया है, इसलिए मुझे कूड़ा रखने नीचे जाना पड़ा।’ उसने कहा।

मैं तो जैसे होश ही खो बैठा। ‘तुम क्या कह रही हो? क्या तुम अभी कमरे में नहीं थी?’

‘नहीं।’ शोभा ने जवाब दिया।

‘तो फिर वह किसकी आवाज़ थी और कौशल को दोलन कुर्सी पर किसने रखा?’ मैंने प्रश्न किया।

‘मैं कुछ समझी नहीं। मुझे पूरी बात बताओ।’ शोभा हैरान होकर बोली।

मैंने उसे सारी बातें बताई। बेस्मन्ट में हुई घटना से लेकर रात वाली घटना तक और फिर आज सुबह हुई घटना के बारे में भी। सब कुछ सुनने के बाद शोभा के चेहरे का रंग फीका पड़ गया और उसके चेहरे पर अजीब से भाव आ गए। पर यह कोई अविश्वास भरे भाव नहीं थे। उसे मेरी बातों पर भरोसा था। शोभा जानती थी कि मैं कभी इस तरह का भदा मज़ाक नहीं करता और ना ही कभी झूठ बोलता हूँ।

‘तो अब हम क्या करें?’ शोभा ने असहाय होकर मुझसे पूछा।

‘सबसे पहले हमें अपने पड़ोसी से बात करनी चाहिए।’ मैंने सुझाव दिया।

‘हाँ, यह सही रहेगा।’ वह मेरे सुझाव का समर्थन करते हुए बोली।

हम फौरन सारस परिवार के घर गए। काफी देर तक दरवाज़े पर दस्तक देने के बाद बैनी सारस ने दरवाज़ा खोला। परंतु हमें अंदर नहीं आने दिया गया। घर के अंदर सभी चीजें बिखरी पड़ी थीं। मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाकर बैनी से बात करने की कोशिश की और उन्हें  सारी बातें बताई। मगर वे दरवाज़े पर चुप्पी साधे खड़ी रही और मुझे घूरती रही। ठीक वैसे ही, जैसे उस रात वह मुझे देख रही थीं। हम काफी देर तक वहाँ खड़े रहे और उनके कुछ कहने की प्रतीक्षा करते रहे। जब कोई जवाब न आया, तो मजबूरन हमें वहाँ से लौटना पड़ा। इसी दौरान बैनी सारस ने मुझसे कुछ कहा-

‘तुम उन दोनों से मिल चुके हो। या तो तुम मरोगे या फिर बचा लिये जाओगे।’ यह कहकर उन्होंने फौरन दरवाज़ा बंद कर लिया। मुझे उनकी बात समझ में नहीं आई और ना ही शोभा को। पर मैं इतना अवश्य समझ गया था कि मेरे साथ जो कुछ भी घटा था वह एक सपना नहीं बल्कि हकीकत है।

उसी वक्त मेरे दिमाग में जूना वारिच का ख्याल आया। मुझे विश्वास था कि वे हमारी मदद कर सकती थीं। मैंने शोभा को कौशल के साथ घर जाने को कहा और खुद तेरहवीं मंज़िल पर गया।

मैंने दरवाज़े पर दस्तक दी। जिसपर लिखा था, “जाते वक्त दरवाज़ा लगा दें।” जूना वारिच ने दरवाज़ा खोला और मुझे देखकर मुस्कुराई। उन्होंने मुझे अंदर आने को कहा।

स्वागत कक्ष में अंधेरा था। पर्दों से पूरी खिड़कियाँ ढ़की हुई थीं। फिर भी मेरे आने पर मैड़म जूना वारिच ने कमरे को रोशन नहीं किया। मैं सोफे पर बैठा जब्कि मैड़म वारिच अब भी मुझे देखकर अजीब ढंग से मुस्करा रही थी।

‘आप मिस्टर भावेश रालोसकर हैं ना?’ उन्होंने पूछा।

‘जी, मैं ही हूँ।’ मैंने उत्तर दिया।

‘बोलो कैसे आना हुआ?’ वह मेरे सामने लगे सोफे पर बैठते हुए बोली।

मैं थोड़ा सकपकाया। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं कहाँ से शुरू करूँ। न जाने वह मेरे विषय में क्या सोच लें। इसलिए मुझे उनसे जो भी बातें करनी थी, वह सोच समझ कर करनी थी।

‘आप अकेले रहती हैं?’ मैंने बातचीत की शुरूआत की।

‘हाँ, अब किसी बूढ़े के साथ यहाँ कौन रहना चाहेगा।’ वह बोलीं।

‘आप यहाँ कितने सालों से रह रही हैं?’ मैंने पूछा।

‘अब मुझे अच्छी तरह से तो याद नहीं, फिर भी अगर तुम पूछते हो तो, यही कोई चौबीस-पच्चीस सालों से।’ उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

‘तब तो आप हमारे पड़ोसी बैनी सारस को अच्छी तरह से पहचानती होंगी?’ मैंने पूछा।

‘हाँ, मैं उसे जानती हूँ, पर अब हमारी बात नहीं होती।’ उन्होंने कहा।

‘मगर क्यों?’

‘बस ऐसे ही। तुम उसी से पूछ लेना। वैसे तुम मुझसे बैनी के बारे में क्यों पूछ रहे हो?’ वह मुझे संदेह की दृष्टि से देखते हुए बोली।

मुझे अपने चेहरे पर झूठी मुस्कान लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। मैं नहीं जानता था कि होठों पर लाया गया वह मुस्कान, मेरे असहाय और उदास चेहरे पर कैसा लगता होगा। पर उसे देखकर मैड़म वारिच की आँखें अवश्य सिकुड़ गईं थी। फिर वहाँ कुछ देर तक खामोशी छाई रही।

‘आपको नहीं लगता कि वे लोग थोड़े अजीब हैं?’ मैंने पुनः बातचीत की पहल की।

‘अजीब से तुम्हारा क्या मतलब है?’ मैड़म वारिच ने पूछा। वह अब मुझसे थोड़े उच्चे आवाज़ में बात करने लगी थीं और उनके चेहरे पर छाई हुई मुस्कान भी गायब हो चुकी थी। मेरे लिए बातचीत करना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया था।

‘मेरा मतलब है कि वे लोग किसी से मिलना-जुलना पसंद नहीं करते और ना ही बात करने पर कोई जवाब देते हैं।’ मैंने कहा।

‘क्या तुमने उससे बात की?’ मैड़म वारिच ने उत्तेजित होकर पूछा।

‘हाँ, मैंने बैनी सारस से बात करने की कोशिश की थी मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। शायद वह मुझसे बात नहीं करना चाहती थी।’ मैंने कहा।

मैड़म वारिच ने मुस्कुराते हुए कहा ‘हाँ तो इसमें नया क्या है। इससे पहले भी यहाँ रहने वाले लोगों ने उससे बात करने की कोशिश की थी और उसने तब भी कुछ नहीं कहा था। मुझे आज भी याद है, उन दिनों “बी” विंग के सभी मंजिलो पर लोग रहा करते थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि एक दिन अचानक बालकनी से गिर कर एक औरत ने अपनी जान दे दी। वजह कोई भी नहीं जानता। पर उसके मरने के बाद यहाँ जो कुछ भी हुआ, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। लोग बीमार पड़ने लगे और पागलो की तरह बातें करने लगे। उनकी बातें सुनकर किसी भी रूह कांप जाए। ऐसा लग रहा था मानो उन सभी पर भूतों और प्रेतों का साया हो। वे हर समय अपने आस-पास किसी नकारात्मक ऊर्जा को महसूस करने की बात करते। सारस परिवार ही इकलौता ऐसा परिवार था, जिन्होंने ऐसा कुछ भी अनुभव नहीं किया था। लोगों ने इसका कारण जानने के लिए उनसे बात करने की कोशिश की, पर वह पूरा परिवार खामोश रहा। कुछ और मौते हुईं। फिर यहाँ रहने वाले लोग इतने डर गए कि वे सभी अपने-अपने मकान खाली कर यहाँ से दूर चले गए और कभी लौटकर नहीं आए।’

‘तो क्या यह सब सारस परिवार ने किया था?’ मैंने पूछा।

‘मैं नहीं जानती। और यह बात मायने नहीं रखता कि सारस परिवार का इन घटनाओं से क्या लेना-देना था। यहाँ जो बात जरूरी है, वह यह है कि क्या वे लोग जो पहले यहाँ रहा करते थे, सच बोल रहे थें?’ मैड़म वारिच ने कहा।

‘तो आप अपने घर को छोड़कर नहीं गईं?’ मैंने एक बड़ा ही वाजिब प्रश्न किया।

‘और भला मैं अपना घर छोड़कर कहाँ जाऊंगी!’ मैड़म वारिच ने बड़े ही अजीब लहज़े में मुझसे कहा। ‘खैर छोड़ो इन बातों को तुम मुझे अपने यहाँ आने की वजह बताओ।’

मैड़म वारिच ने मुझे वह सब कुछ बता दिया था, जो मैं जानना चाहता था और मुझे उनकी बातें सच्ची लग रही थीं। अब मेरी बारी थी। मैंने बिना किसी संकोच के उन्हें सारी बातें बता दी। इस दौरान उनके हाव-भाव सामान्य बने रहे। जब मैं अपनी बात खत्म कर चुका था, तब मैं काफी देर तक सोफे पर बैठा उनके कुछ बोलने की प्रतीक्षा करता रहा। जब्कि मैड़म वारिच आँखें बंद किये सोफे पर पड़ी रही। दरअसल वह सो चुकी थीं। सच में बड़ी अजीब बात है। मैं चुपचाप वहाँ से जाने के लिए उठा कि तभी मैड़म वारिच डरावने ढंग से बोलीं ‘क्या तुम्हें लगता है कि वह बूढ़ी औरत तुम्हें बचा पाएगी।’ हालांकि वह अब भी गहरे नींद में थी, पर मैं समझ सकता था कि उन्होंने वह बात मुझसे ही कही थी। वह किसकी बात कर रही थीं, मैं नहीं जानता। कम से कम अब-तक तो नहीं। मैं आगे कुछ सोच पाता या फिर वहाँ से लौटने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा पाता, मुझे उसी पल कुछ महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे मैड़म वारिच के कमरे में कोई मौजूद था। मैं चुपके से उस ओर बढ़ा, जहाँ मुझे किसी के होने की अनुभूति हो रही थी। मैंने कमरे का दरवाज़ा खोला, तो ऐसा लगा कि वहाँ पलंग पर कोई लेटा हुआ था। सच में कोई लेटा हुआ था। तो फिर मैड़म वारिच मुझसे झूठ क्यों बोल रही थी। इससे पहले मैं एक और कदम आगे बढ़ा पाता, मैड़म वारिच के ठंडे हाथ मुझपर पड़े और मैं अंदर नहीं जा पाया। उन्होंने फौरन दरवाज़ा बंद कर दिया और बेहद नाराज़ होकर बोलीं ‘तुम कमरे में क्या करने जा रहे थे?’

‘कुछ नहीं।’ मैंने यूँ ही घबराकर कह दिया।

‘तो फिर तुम यहाँ क्या करने आए हो?’ वह और भी ज्यादा गुस्से में बोली। पर वह ज्यादा जोर से नहीं बोल रही थीं। जाहिर था, वहाँ अंदर जो कोई भी था, वह उस तक अपनी या मेरी आवाज़ नहीं पहुँचने देना चाहती थी। इतना काफी था मेरे डर को बढ़ाने के लिए।

‘मुझे माफ़ कीजिएगा।’ मैं बस इतना ही बोल पाया और वहाँ से चलता बना। मैड़म वारिच भी मेरे पीछे कुछ दूर तक आई। मैं इतना डर हुआ था कि लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों से उतरने लगा। एक बात तो तय थी, मैड़म वारिच मुझसे कुछ छिपा रही थी और यहाँ कुछ ऐसा चल रहा था, जिसके ऊपर मेरे जैसे आम आदमी का कोई भी नियंत्रण नहीं था और ना ही कभी होने वाला था।

कैसे भी सही-सलामत मैं अपने घर के दरवाज़े तक पहुँचा, तब मेरी नजर दरवाज़े पर बनी उस निशान पर पड़ी, जो काफी हद तक किसी बहते हुए पानी के तरंग की तरह नजर आ रहा था। फर्क सिर्फ मेरी धोखा खाती नज़रों में था, क्योंकि कभी-कभी वह मुझे हिलता हुआ सा प्रतीत हो रहा था। वह स्लेटी रंग का निशान इससे पहले मैंने अपने दरवाज़े पर नहीं देखा था। खैर जो भी था मैं उसे वही छोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया। मैड़म वारिच से हुई अपनी बातचीत को मैं शोभा को बताने के लिए व्याकुल हो रहा था। पर इससे पहले मैं कुछ बोल पाता, मेरी नज़रों के सामने छाए उस दृश्य ने मुझे एकदम से मौन कर दिया।

शोभा, कौशल को पकड़े एक कोने में खड़ी थर-थर कांप रही थी। जब्कि एक बूढ़ी महिला, अपने हाथों में लंबी छतरी पकड़े उसे निहार रही थी। मैं उस महिला के पीछे खड़ा था, अगर चाहता तो पलक झपकते उसे मार सकता था। पर किसी महिला को मारना, इस विचार ने मुझे रोक दिया।

आप कौन हैं? यह मैं पूछ पाता, उससे पहले वह बोल पड़ी ‘बैठ जाओ लड़के?

आवाज़ कुछ-कुछ जानी पहचानी सी थी। दरअसल यह वही बुजुर्ग महिला थी, जिन्हें पिछली रात मैंने अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी थी। जब उन्होंने अपना चेहरा मेरी तरफ किया, तब मेरी बची-खुची शंका भी गायब हो गई।

‘आप यहाँ?’ मैंने बेहद हैरानी से पूछा।

‘मेरा नाम एर टोलस्काइ है। तुम चाहो तो मुझे मिस स्काइ बुला सकते हो।’ उन्होंने कहा।

मुझे नहीं मालूम कि उस वक्त मेरा बर्ताव कैसा होना चाहिए था। पर अगले ही पल मेरे मन में एक अजीब सी खुशी घर कर गई। ‘क्या मैड़म वारिच और सारस इन्हीं की बात कर रहे थे?’ मैंने खुद से प्रश्न किया।

‘हाँ तुम सही कह रहे हो। वे लोग मेरी ही बात कर रहे थे।’ उन्होंने बेहद सहजता से कहा।

मैं पल भर के लिए सुन्न रह गया। क्या उन्होंने अभी-अभी मेरी मन की बातों को सुनकर जवाब दिया था।

‘ज्यादा मत सोचो बच्चे, मैं यहाँ तुम्हारी मदद के लिए आई हूँ।’ मिस स्काइ ने कहा।

कहते है डूबने वाले को तिनके का सहारा भी काफी होता है। इस वक्त तो मेरे और मेरे परिवार के ऊपर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती थी। मैंने बग़ैर किसी संकोच के पूछा ‘आप मेरी मदद कैसे कर सकती हैं?’

‘उसकी चिंता करना छोड़ दो बच्चे। तुम मुझे यह बताओ कि तुम इस जगह के बारे में कितना जानते हो?’ उन्होंने गंभीरता से पूछा।

मैंने उन्हें सारी बातें समझाई। और सब कुछ धैर्य से सुनने के बाद वे मन ही मन मुस्कुराई और फिर कहा ‘तुम आयामों के बारे में कितना जानते हो?’

‘ज्यादा तो नहीं, मगर इतना अवश्य जानता हूँ कि यह किसी तरह का दरवाज़ा होता है, एक दुनिया से दूसरी दुनिया में जाने का।’

‘इतना काफी है। अब मैं तुम्हारी जानकारी के लिए यह भी बता दूँ कि ये आयाम पृथ्वी पर भी मौजूद होते है, जिन्हें बस कुछ ही लोग देख पाते है।’ मिस स्काइ ने कहा।

‘मैं कुछ समझा नहीं।’ मैं बोला।

‘क्या तुम कभी अपने इस “बी” विंग के अलावा किसी दूसरे विंग में गए हो और वहाँ के लोगों से मिले हो?’ उन्होंने पूछा।

‘नहीं।’ मैंने उत्तर दिया। ‘पर मैं अपने पड़ोसियों बैनी सारस और मैड़म वारिच से ज़रूर मिला हूँ और यहाँ के चौकीदार से भी। कई बार सफाई वाले से भी मिला हूँ, पर आज कल वह नहीं दिखता।’

‘मुझे तुम्हें विस्तार में बताना होगा। पर इससे पहले तुम मेरे साथ चलो।’ वह फौरन मुख्य दरवाज़े की तरफ बढ़ी।

मैं भी शोभा और अपने बच्चे के साथ उनके पीछे-पीछे चल पड़ा। हम लगभग एक-एक कर सारे विंग में गए, मगर हमें वहाँ कोई भी न दिखा। सभी विंगो के सारे घर खाली थें। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है। ‘ये सारे घर खाली क्यों हैं?’ मैंने हैरानी से पूछा।

‘क्योंकि मेरे बच्चे, यहाँ कभी कोई रहता ही नहीं था।’ वह बोलीं।

‘आपका क्या मतलब है? कल-तक तो ये सारे विंग भरे हुए थें।’ मैं थोड़ा परेशान होकर बोला।

‘बिल्कुल! और अब यह सही समय है, जब मुझे तुम्हें सारी बातें बता देनी चाहिए।’ मिस स्काइ बोलीं।

हम फिर चुपचाप विंग से बाहर निकल आए और मिस स्काई ने हमें बताना शुरू किया।

‘मैं पहले तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर दूँ, उससे पहले ये जान लो कि यहाँ तुमने जो कुछ भी देखा है, वह एक शक्तिशाली जादू का ही परिणाम था। यहाँ रहने वाले लोग हों या फिर वह चौकीदार या सफाई करने वाला। चूंकि एक व्यक्ति दूसरे लोगों को देखने का आदी होता है, इसलिए इस जादू को सफलता से चलाना आसान होता है।’ मिस स्काइ ने कहा और मैं तो बस शोभा को भौचक्का होकर देखता रह गया। उन्होंने बोलना जारी रखा, ‘अब हम आयाम की बात कर लेते हैं और थोड़ा तुम्हारे बारे में भी। तीन तरह के लोग होते है, एक वो जो आयामों को देख नहीं सकते, पर उसके बारे में जानते अवश्य हैं और वे विज्ञान और उसकी सहायता से उसे खोलने का प्रयास कर रहे हैं। अब हम दूसरे तरह के लोगों की बात करते हैं। ऐसे लोग आयामों को आसानी से देख और पहचान सकते हैं और उसे खोलना भी जानते हैं, पर इसके बावजूद भी वे उसमें दाखिल होकर दूसरी दुनिया या जगहों पर नहीं जा सकते। ऐसे लोगों को आयामों में दाखिल होने से निष्कासित किया गया है। इसलिए ज्यादातर ये लोग आयामों की रेखा पर रहते है और वहीं अपना घर बनाते है। ताकि जब भी मौका मिले वे किसी दूसरे की सहायता के से दूसरी दुनिया में जा सकें। और अब यहीं तुम आ जाते हो और तुम्हारा परिवार भी। तुमलोग आयामों को देख सकते हो, उसे खोल सकते हो पर तुम्हें पता नहीं कि यह किया कैसे जाता है।’

मैं शोभा को इन बातों पर यकीन न करने की सलाह देना चाहता था। उधर मिस स्काइ बोलती रहीं, ‘तुमलोग जिस इमारत में रह रहे हो, यह भी उन्हीं आयामों की रेखा पर स्थित है। और यहाँ प्रवेश करते ही तुम भी उस जादू के बंधन से जुड़ गए, जिसकी वजह से तुम इस आयाम को नहीं खोल पाए। जादू ने तुम्हें काल्पनिक चीजें भी दी हैं, जिससे तुम अपनी असल दुनिया से जुड़े रहे। अपने आस-पास लोगों को देखना इसी जादू का हिस्सा था।’

इन सब बातों पर यक़ीन करना थोड़ा मुश्किल ज़रूर था, पर मैं इतना अवश्य जानता था कि वह मनगढ़ंत बातें नहीं गढ़ रही थीं। खैर अब हम अपने घर पहुँच चुके थें। शोभा ने स्वागत कक्ष के मुख्य दरवाज़े को बंद किया और बातचीत का सिलसिला फिर से शुरू हो गया। मेरे मन में जो सबसे पहला प्रश्न आया वह यह था कि क्या मैड़म सारस और वारिच भी मेरी एक कल्पना थी? फिर वह दूसरा और तीसरा प्रश्न भी मेरे मन में सहसा उठ खड़ा हुआ। क्या वह साया भी मेरी एक कल्पना थी? या फिर मिस स्काइ हमलोगों की कल्पना हैं? किन बातों पर यक़ीन करना है और किन पर नहीं, यह सच में तय कर पाना मुश्किल था।

‘हाँ मुझे पता है कि तुम क्या सोच रहे हो।’ मिस स्काइ ने कहा। ‘सारस और वारिच परिवार वास्तव में यहाँ रहते हैं। मगर तुम किस साए के बारे में सोच रहे हो, यह मैं अवश्य जानना चाहूँगी।’

‘तो क्या आप दोनों परिवारों को जानती हैं?’ मैंने पूछा।

‘हाँ मैं उन दोनों को जानती हूँ।’ उन्होंने गंभीरता से कहा। ‘पहले कभी यह जगह यात्रा करने वालों का ठिकाना हुआ करता था। लोग यहाँ से दूसरी दुनिया और जगहों का सफर किया करते थे। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि तब लोग नौकरी करने और चीजों को खरीदने, घूमने-फिरने और अनेक मामूली कामों के लिए दूसरी दुनिया आया-जाया करते थे। पर एक बात ध्यान रहे, ऐसा सिर्फ वही लोग कर सकते है, जो आयामों की रेखा को देख और पहचान सकते हैं। खैर, ऐसी सात दुनियाँ है, जहाँ लोग अलग-अलग मकसद से आया जाया करते थें, जब्कि दो और ऐसी दुनियाँ है जहाँ किसी का भी जाना वर्जित है। खास करके मनुष्य तो वहाँ हरगिज़ नहीं जा सकते। इन अलग-अलग आयामों के बारे में मैं तुम्हें फिर कभी बताऊंगी। जूना वारिच और बैनी सारस भी ऐसे ही लोगों में से एक थें, जो अक्सर इन आयामों का इस्तेमाल किया करते थें। दोनों हमलोगों की दुनिया विंडविज आकर जादू और उससे जुड़ी चीजें सीखा करते थे। एक बार बैनी और जूना अपने साथ विंडविज से लैवियल नाम के दोस्त को यहाँ लेकर आए। पर किसी कारण से उसने छत से कूदकर अपनी जान दे दी। हमने मामले की छान बीन की तो कुछ भी हाथ न आया। सिवाय उन आरोपो के जो जूना ने बैनी पर लगाए थें। जूना के मुताबिक बैनी ने लैवियल पर किसी तरह का जादू किया था, जिसकी वजह से वह आत्महत्या कर बैठी। जब बैनी से पूछा गया तो उसने सिर्फ इतना कहा कि वह निर्दोष है। इसके अलावा उसने कुछ भी न कहा। बहरहाल इससे जूना को दोषरहित नहीं किया जा सकता था। इसलिए हमने उनके दिमाग से आयामों को खोलने का तरीका मिटा दिया और उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए यही कैद होकर रहने की सजा दी। और अब मुझे उस साए के विषय में जानना है, जिसे तुमने बैनी के घर देखा था।’

‘यह बात आप कैसे जानती हैं?’ मैंने हैरानी से पूछा।

‘मुझे तुम्हारी पत्नी ने बताया।’ वह बोलीं। ‘अब क्या तुम मुझे उस साए के बारे में विस्तार से बताना चाहोगे?’

‘हाँ ज़रूर। पर मैं उसके चेहरे के बारे में कुछ भी नहीं जानता। पर मैंने शायद उसकी आँखें देखी हैं। जो किसी बिल्ली की तरह थी। उसका पूरा शरीर हवा में तैर रहा था। उसके वस्त्र काले और पारदर्शी थें। मैं नहीं जानता कि वह वाकई उसके वस्त्र थें या फिर उसका पूरा शरीर ही काला और पारदर्शी था।’

यह सुनकर मिस स्काइ के चेहरे का रंग फीका पड़ गया। उन्होंने अपने बस्ते से एक अजीब सी किताब बाहर निकाली, जिसका खोल लकड़ी का था और उसपर की लिखावट मेरे लिए अपरिचित थी। मैंने किताब को छू कर देखना चाहा और मेरे स्पर्श करते ही वह किताब अजीब ढंग से हिला और उसपर की लिखावट एकदम से बदल गई। अब मैं उसे पढ़ सकता था। उसपर लिखा था “आयामों के प्राणी।

‘किताब पकड़ो और उस प्राणी की कल्पना करो?’ मिस स्काइ बोली।

मैंने किताब को छुआ और उस साये की कल्पना करने लगा। जब मैंने उसके बारे में सब कुछ सोच लिया था, तब वह किताब फिर से हिला और खुद-ब-खुद पन्नों को पलटते हुए, वहाँ जा पहुँचा जहाँ उस प्राणी की तस्वीर बनी हुई थी। उसका शीर्षक था ‘गौड्रिल’।

‘हाँ यह वही प्राणी है, जिसे मैंने सारस परिवार के घर देखा था।’ मैं उत्तेजित होकर बोला।

गौड्रिल।’ वह गंभीरता से बोली। ‘बेहद खतरनाक, निर्दयी और शक्तिशाली। इनकी दुनिया सातवें आयाम में है। जिसे हम गौड्रियन कहते हैं। एक समय उनकी दुनिया भी जीवन से परिपूर्ण लहलहाती हुई सी थी। पर उन्होंने वह सब कुछ तबाह कर लिया, जो कभी उनका अपना हुआ करता था। अब वहाँ बंजर ज़मीन, सूखे पेड़-पौधे, कंकालों के अलावा और कुछ भी शेष नहीं बचा। ऐसा उन्होंने महज सौ सालों के भीतर कर दिया था। इससे तुम उनकी शक्तियों का अंदाजा लगा सकते हो। अंधेरे में रहने वाले ये जीव अक्सर आयामों के ज़रिए अलग-अलग दुनियाओं का सफर करते हैं। और जहाँ भी जाते हैं बस तबाही ही तबाही मचाते हैं। आठवें आयाम में बसी दुनिया को छोड़कर, सभी ने मिलकर गौड्रियलों से युद्ध किया और मुश्किल से उन्हें काबू में करके, उन्हें उनकी दुनिया में हमेशा-हमेशा के लिए कैद कर दिया।’

‘क्या गौड्रिल भूत-प्रेत जैसी कोई चीज है?’ शोभा ने काफी देर बाद कुछ कहा था।

‘मैं कहूंगी उनसे भी भयानक। उन्हें मारा नहीं जा सकता। उनका निर्माण तो मृत शरीर के आत्माओं को कैद करने और उन्हें सुरक्षित छठे आयाम में ले जाना के लिए हुआ था। मगर वे जल्द ही अपने काम से ऊब गए और अलग रास्ता चुन लिया। इससे सभी आयामों का संतुलन बिगड़ने लगा। प्रेत जीवित लोगों के संपर्क में रहकर शक्तिशाली बनने लगे। उनमें चीज़ों को छूने, उठाने और फेंकने जैसी शक्तियाँ आ गईं। सभी जानते थें कि उन्हें हराना मुश्किल था, इसलिए समस्त आयामों के प्रमुख ने सब की सहमति से, उन आत्माओं या यूँ कहें प्रेतों से संधि कर ली और उन्हें रहने के लिए छठा आयाम दे दिया। यह वही आयाम था जहाँ गौड्रिल प्रेतों को कैद करके रखा करते थें। अब हमारे सामने चुनौती यह थी कि आखिर नए प्रेतों (आत्माओं) को कौन नियंत्रित करेगा और उन्हें छठे आयाम तक पहुँचाएगा। जब किसी को भी कुछ न सूझा, तब यह ज़िम्मेदारी मैंने ले ली। इसी दौरान मुझे पता चला कि सातवें आयाम का दरवाज़ा पहले ही खोला जा चुका था। यह किसका काम था, यह मैं नहीं जानती थी, पर अब मुझे लगता है कि मैं अपने उत्तर के बेहद करीब आ पहुँची हूँ। हमें बैनी से बात करनी होगी।’ मिस स्काइ ने कहा और घड़ी की ओर अपनी नज़रे घुमाई।

रात के आठ बज चुके थें, जब मैं और मिस स्काइ बैनी सारस के दरवाज़े पर पहुँचे। मैंने दरवाज़े पर दस्तक दी और बगैर किसी देरी के बैनी ने दरवाज़ा खोल दिया। मानो वह इसी इंतजार में बैठी हुई थीं। उन्होंने हमें फौरन अंदर बुलाया और दरवाज़ा बंद कर लिया। हमारे पास सारस परिवार की सेहत और अच्छे भाग्य के बारे में जानने का समय नहीं था और यह बात बैनी भी जानती थी। मैंने गौर किया कि बैनी सारस को छोड़कर उनके पूरे परिवार का शरीर पारदर्शी था। इसका मतलब मैं आत्माओं के बीच खड़ा था। उनकी बहू और वह छोटा सा लड़का, जिनका शरीर या फिर मुझे कहना चाहिए जिनकी आत्मा सफेद रंग की थी और वे मुझे ही घूर रहे थें। मैं चाहकर भी उनपर से अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहा था।

‘बैनी, तुम जो कुछ भी जानती हो मुझे बताओ।’ मिस स्काइ ने कहा।

‘मिस एर टोलस्काइ!’ मैं मैड़म सारस की खुशी को महसूस कर सकता था। यह मदद मिलने की खुशी थी। मेरे लिए यह समझना आसान था। ‘मुझे आपको पहले ही सब कुछ बता देना चाहिए था। पर मैं इतनी डर गई थी कि मैं कुछ भी नहीं बोल पाई।’

‘कोई बात नहीं बैनी, अब तुम मुझे बेफिक्र होकर सब कुछ बता सकती हो।’ मिस स्काइ ने बेहद नरमी से कहा।

‘उस रात जब हम विंडविज से लैवियल को लेकर यहाँ आए, तो हम उस बात को लेकर काफी रोमांचित थे। आखिर हमने पहली बार सुरक्षा घेरों को धोखा देने का काम किया था। जूना और लैवियल ने मेरे साथ यही रूकने का फैसला किया। अगले दिन हम लैवियल को हमारी दुनिया की सैर कराने वाले थें। पर रात बहुत लंबी थी और जूना कुछ और नियमों को तोड़ना चाहती थी। मुझे नहीं पता कि उसने ऐसा अनजाने में किया था या नहीं, पर उस वक्त हमें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि खतरा इतना बढ़ सकता है। जूना ने ज़िद पकड़ ली कि वह सातवें आयाम को खोलना चाहती है। वह ऐसा बस मजे के लिए करना चाहती थी। हमने उसे रोकना चाहा पर उसके ज़िद के आगे हमारी एक भी न चली और अंततः हम दोनों को उसकी बात माननी पड़ी। वह अच्छी जादूगरनी थी। क्योंकि उसने महज कुछ ही प्रयासों में सातवें आयाम को खोल दिया था। हम अंदर दाखिल हुए। वह जगह श्मशान से भी बदतर थी। वहाँ देखने जैसा कुछ भी न था। हम सभी वहाँ से लौट आए। मगर एक चूक हो गई। हम सातवें आयाम को बंद करना भूल गए। उस रात जब हम सो रहे थें, तब मैंने लैवियल को बाहर जाते देखा। मैंने उसे आवाज़ लगाई पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैं चुपके से उसके पीछे चल पड़ी। फिर मैंने लैवियल को अचानक हवा में उड़ते देखा और वह बिजली की गति से इमारत के छत तक पहुँची और वहाँ से गिर कर उसकी मौत हो गई। मैं घबराकर जूना के पास पहुँची और जो दृश्य मेरी आँखों के सामने था, मुझे आज भी उसे याद करने और बताने में डर लगता है।’ बैनी अचानक ही फूट-फूट कर रो पड़ी।

‘तुम्हें कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है बैनी। आगे जो कुछ भी हुआ वह मैं जानती हूँ। संभव है कि तुमने जूना को छत से उलटा लटके देखा होगा। उसकी गर्दन उसके पीठ की तरफ मुड़ी होगी और उसकी लाल आँखें तुम अंधेरे में भी देख पा रही होगी। और नीचे दर्जन भर गौड्रिल उसकी सेवा में खड़े होंगे।’ मिस स्काइ ने सहजता से कहा।

‘हाँ मगर आप इतना कुछ कैसे जानती हैं?’ बैनी आतुर होकर बोलीं।

‘क्योंकि जो भी गौड्रिलों को आज़ाद करेगा, वे सदा के लिए उसके ग़ुलाम बनकर रहेंगे। मेरे ख्याल से जूना इस बात से भली-भांति अवगत थी और शायद इसी वजह से उसने सातवें आयाम को खोला और उसे खुला ही रहने दिया।’ मिस स्काइ ने कहा।

‘तो उनके यहाँ आने का मकसद क्या है?’ मैंने पूछा।

‘विंडविज पर अपना अधिकार जमाना।’ बैनी सारस ने कहा।

‘और कुछ, जो तुम मुझे जूना के विषय में बताना चाहती हो?’ मिस स्काइ ने बैनी से पूछा।

‘नहीं! मुझे जितना पता था, मैंने वह सब कुछ बता दिया है।’ बैनी ने कहा।

‘मैं कुछ कहना चाहता हूँ।’ मैंने कहा। ‘आज जब मैं तेरहवीं मंज़िल पर जूना वारिच के घर गया था, तब मैंने उनके कमरे में किसी और को भी देखा था। अंधेरे की वजह से मैं उसका चेहरा नहीं देख पाया, पर एक बात मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि वह वहाँ अकेले नहीं रहती।’

‘वह मेरी बेटी जूलियट होगी। गौड्रिल उसे उठाकर ले गए थें।’ बैनी की बहू ने कहा।

फिर वहाँ गहरी खामोशी छा गई। सभी चुपचाप मिस स्काइ की तरफ देखने लगे। उनके फैसले का इंतजार करते हुए-

‘तो अब समय आ गया है। हमारे पास उन गौड्रिलों का सामना करने के अलावा और कोई चारा नहीं है।’ मिस स्काइ ने नाटकीय अंदाज़ में कहा।

तब हमने कोई योजना नहीं बनाई थी, जब यह सब शुरू हुआ। शुरूआत एक तेज रोशनी से हुई, जिससे पूरा कमरा रोशन हो उठा। फिर यकायक सब कुछ अंधेरे में समाता चला गया। चाँद की रोशनी भी अब किसी काम की ना रही। शायद बादलों ने उनपर ग्रहण लगा दिया था। गहरे सन्नाटे में जो पहली आवाज़ हुई, वह मिस स्काइ की थी। उन्होंने चुटकी बजाई और उनके छाते का अगला हिस्सा जल उठा। कमरा रोशन हुआ, जिससे थोड़ी राहत मिली, पर वह भी ज्यादा देर तक हमारे साथ न टिक सकी।

गौड्रिल!’ बैनी सारस काँपती हुई आवाज़ में बड़बड़ाईं।

यह सब आखिर शुरू हो ही गया था। मेरी नजर दरवाज़े पर पड़ी। क्योंकि मेरे कानों ने वहाँ कुछ हलचल महसूस की थी। मिस स्काइ ने भी अपने छाते का रूख उस ओर कर लिया था। दरवाज़े का दस्ता बेहद धीमे से एक ओर घूमा और फिर चरमराती हुई आवाज़ के साथ वह दरवाज़ा खुला।

जूलियट!’ बैनी सारस चिल्लाईं और फौरन उस ओर बढ़ी।

‘रुको बैनी।’ मिस स्काइ ने उन्हें उसी पल आगे बढ़ने से रोक लिया। और बेहद कड़क लहज़े में बोलीं ‘जूलियट क्या वह तुम हो?’

सामने से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। यह सच में संदेहजनक बात थी। ‘जूलियट अंदर आ जाओ बेटी।’ बैनी सारस की बहू ने कहा। मैं उनके दुख को महसूस कर सकता था।

शायद जूलियट ने उनकी बात सुन ली और वह बेहद अजीब ढंग से हमारी तरफ चलकर आई। ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो उसे जान-बूझ कर चलाया जा रहा हो। फिर कमरे में जूना वारिच दाखिल हुईं।

‘एर टोलस्काइ! तुमसे मिलकर खुशी हुई।’ जूना ने इतराकर कहा।

‘अदब से बात करो जूना, तुम्हें याद कर लेना चाहिए कि तुम किसके सामने खड़ी हो।’ बैनी ने गुस्से में कहा।

जूना अभद्र तरीक़े से हंसी और बेहद रूखे अंदाज़ में बोली ‘मुझे माफ करना बैनी, पर क्या अब मुझे बातचीत करने का ढंग तुमसे सीखना होगा? संभव है कि तुम्हारी नज़रों में मिस स्काइ उन महान जादूगरनियों में से एक होंगी, जिसने सभी आयामों में शांति स्थापित करने में मदद की थी। इसने एक आयाम को दूसरे से जोड़ा और सिर्फ मनुष्यों को इजाज़त दी कि वे उनके जरिये दूसरी दुनिया में आ-जा सकें।’

‘तो इसमें गलत क्या है?’ बैनी ने बिगड़कर कहा।

‘मैं तुम्हें बताती हूँ गलत क्या है। पर सबसे पहले यह जान लो कि अब कोई और भी है, जो मिस टोलस्काइ से ज्यादा शक्तिशाली है।’ मैं जानता था जूना स्वयं को संबोधित कर रही थी। ‘मिस स्काइ ने सभी आयामों में शांति स्थापित की, पर यह कितना सच है यह बात तुम्हें स्वयं मिस स्काइ से पूछना चाहिए। वे लोग या जीव, तुम उन्हें जो भी कह लो, वे दूसरे आयाम के लोगों को जरा भी पसंद नहीं करते। यह नफरत मैंने उनकी आँखों मे देखी है। हाँ मगर वे अपने स्वार्थ के लिए हमारा इस्तेमाल करना अवश्य जानते हैं। तुमलोगों ने सिर्फ मनुष्यों को इजाज़त दी कि वे दूसरे आयामों का सफर कर सके। मैं तुमसे पूछना चाहती हूँ कि ऐसा करके तुम क्या साबित करना चाहती थीं? क्योंकि हम मनुष्यों ने यही महसूस किया है कि दूसरी दुनिया के लोगों के सामने, हम कितने कमजोर, लाचार और बेबस हैं। और क्या महान जादूगरनी मिस स्काइ को ऐसा लगता है कि वहाँ रहने वाले प्राणी, पृथ्वी पर नहीं आते, क्योंकि वे नियमों को मानने वाले भले लोग हैं! तो फिर मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि वे हमारी दुनिया में आते हैं, यहाँ के लोगों को अगवा करते है और भला कौन जाने उन मनुष्यों का क्या होता है।’

‘इनमें से बहुत सी बातों को मैं गलत नहीं ठहरा सकती जूना।’ मिस स्काइ ने एक लंबे अंतराल के बाद कहा। ‘पर तुमने जो कुछ भी कहा है, वह फैसला मेरे अकेले का नहीं था। वह कदम सभी आयामों की सहमति से, मिलकर उठाया गया था। यह बात अलग है कि चीजें हमारी कल्पनाओं के विपरीत घटीं।’

‘और उन फ़ैसलों में मनुष्य कहाँ थें? क्या उन्हें शामिल किया गया था?’ जूना ने गंभीर लहज़े में पूछा।

‘नहीं।’ मिस स्काइ ने जवाब दिया। ‘और इसका कारण तुम भी जानती हो। मनुष्य पहले ही देशों, प्रांतों और जातियों में बटे हुए थें। फिर समस्या थी, देशों के अलग-अलग शासक। हर देश का अपना शासक। कोई भी ऐसा न था जो सर्वोपरि हो। और जो सर्वोपरि बनता, उसके प्रतिद्वंद्वी उसे अपना खतरा मानकर एकजुट हो जाते और उसे नीचे गिरा देते। फिर भी हमने कई बार कोशिशें की और हर बार नतीजा वही निकला। सभी शासक दो दलों में बट जाया करते। एक हमारी बातों का समर्थन करने वाले और दूसरा हमारा विरोध करने वाले। बात युद्ध तक आ पहुँचती और हमें मजबूरन पीछे हट जाना पड़ता। बहरहाल हमने उनलोगों को चुना जो युद्ध और राजनीतिक नीतियों से हटकर सोचने वालों में से थें। उनका मकसद तो बस चीजों को सीखने और सिखाने का था। शांति का था। हमने उनका संपर्क आयामों से करवाया और वे अपनी अगली पीढ़ी का संपर्क आयामों से करवाते और इस तरह चीजें सदियों से शांतिपूर्ण ढंग चली आ रही हैं।’

‘तो तुम विफल रही। मगर अब चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं टोलस्काइ। मैं मनुष्यों को एकजुट करूंगी… मैं उनकी रानी बनूँगी… और फिर पृथ्वी सभी आयामों से ज्यादा शक्तिशाली बनेगा।’ घमंड में चूर होकर जूना बोली।

‘और भला तुम ऐसा करोगी कैसे?’ मिस स्काइ ने अपनी छतरी पर पकड़ मजबूत करते हुए पूछा।

मैंने जूना को मुस्कुराते हुए देखा। तभी शोभा अंदर दाखिल हुई। मुझे एहसास हो गया था कि कुछ बुरा होने वाला है। और यह सब बस पलक झपकते ही हो गया-

मिस स्काइ ने अपनी छतरी उठाई और शोभा को दरवाज़े से पीछे धकेल दिया। इधर जूना का हाथ उठा, जिसमें से तेज रोशनी बाहर निकली, जो सीधा जूलियट पर पड़ी और एक के बाद एक दर्जन भर गौड्रिल उसके शरीर से बाहर निकल आए। इससे पहले मैं कुछ और देख पाता – धड़ाम की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी और सब कुछ सुन्न और अंधकारमय हो गया।

मैंने शोभा को रोते सुना और फौरन उठकर खड़ा हो गया। मुझे पता नहीं मैं कितनी देर तक वहाँ पड़ा था, पर एक बात साफ थी कि अभी खतरा टला नहीं था। क्योंकि मिस स्काइ अब भी कमरे के अंदर गौड्रिलों से संघर्ष कर रहीं थी। इधर शोभा वहीं बैठी रो रही थी। और मेरा बेटा अपनी माँ का पल्लू पकड़े चिल्ला रहा था। जब्कि बैनी, उनकी बहू और उसका बेटा, शोभा को घेरे खड़े थें। जूलियट भी वहीं मूर्छित पड़ी थी। आस-पास काफी सारा खून फैला हुआ था। मैंने गौर किया कि शोभा ने किसी को अपनी बाजुओं में जकड़ रखा था। मैं चुपचाप उसकी ओर बढ़ा, न जाने वह किसको पकड़े रो रही थी। चलते वक्त मैं काफी हल्का महसूस कर रहा था। खैर उसके पास पहुँचकर मैं झुका और वह दृश्य सच में दुखद था। अगर अब मेरे पास दिल होता तो वह जोरों से धड़क कर वहीं थम गया होता। परंतु ऐसा होना संभव न था। क्योंकि मैं मर चुका था और शोभा मेरे मृत शरीर को पकड़े रो रही थी। मुझे समझ में नहीं आया कि भला यह एक झटके में ही कैसे हो गया और मैं कैसे अफसोस करूँ। अफसोस करने की काफी वजहें थीं। और इसमें कोई शक नहीं था कि शोभा और मेरा बेटा उन वजहों में सबसे ऊपर थें। मैंने रोने की कोशिश की, पर तमाम दुखों के बावजूद मेरी आँखों से आँसू न छलके। मैंने शोभा को आवाज़ भी लगाई पर कुछ न हुआ। फिर मैंने अपने इस हालत पर गौर किया और मुझे सब कुछ याद आ गया। दरअसल जब जूलियट के शरीर से गौड्रिल बाहर आए थें, तब उन्हीं में से किसी ने मुझे उछाल कर दरवाज़े के बाहर फेक दिया था। और मेरा सिर दीवार से इतनी जोर से टकराया कि मेरी मौत हो गई।

उसी पल कमरे के अंदर से बड़ी ही भयानक आवाज़े आईं। ये गुर्राहट गौड्रिलों की थीं। वे सारे पूरी ताकत लगाकर मिस स्काइ तक पहुँचना चाहते थें। जूना भी पूरी ताकत के साथ उनपर हमला कर रही थी। मिस स्काइ का पैर खुद ब खुद पीछे खिसकता जा रहा था फिर भी उन्होंने अपनी जादुई छतरी से सबको रोक रखा था।

मैं फौरन उनकी मदद करने कमरे में दाखिल हुआ। मिस स्काइ ने जिस हाथ से जादुई छाते को पकड़ रखा था, उन हाथों की नसे बाहर उभर आईं थी। जब्कि वह अपने दूसरे हाथ से जूना के हमले को रोक रही थीं।

मिस स्काइ थोड़ा और पीछे जा चुकी थीं, और दर्जन भर गौड्रिल उनके और करीब आ चुके थें। मैं फौरन उनमें से एक की तरफ बढ़ा। मुझे मिस स्काइ की छड़ी से निकल रही उष्मा महसूस हुई। अगर मैं जीवित होता तो वह निस्संदेह मेरे शरीर को जला डालती। इसी बीच मैं गौड्रिल के बेहद निकट जा पहुँचा था। मुझे नहीं मालूम कि मैं किस तरह से मिस स्काइ की मदद करता, पर मैं आगे बढ़ चुका था।

मैंने अपने हाथों से गौड्रिल पर एक ज़ोरदार प्रहार किया। जैसे ही मेरा हाथ गौड्रिल को छुआ, वह बेहद तेजी से उसके शरीर के अंदर समाता चला गया। मैंने बर्फ जैसी ठंडक अपने हाथों में महसूस की। फिर वह गौड्रिल किसी मरते हुए पंछी की तरह थरथराया और फौरन पीछे हट गया। उसने व्यग्रता से चारों तरफ देखा। पर मैं उसे नजर नहीं आया। वह पुनः मिस स्काइ की तरफ बढ़ गया। बहरहाल मैंने तीन चीजें समझी, पहली बात तो यह थी कि वह गौड्रिल मुझे देख नहीं सकता था। हालांकि वे आत्माओं को बड़ी आसानी से देख लेते हैं, दूसरी बात यह थी कि मैं चीजों को छू सकता था और तीसरी और सबसे जरूरी बात, गौड्रिल मेरे हमले से पीछे हट गया था। ये तीनों बातें मेरे पक्ष में थीं।

मैं उस छोटी सी जगह में पूरी ताकत से दौड़ा और उस गौड्रिल को धक्का देकर दूर कर देने की कोशिश की। मगर मैंने जैसा सोचा था, वहाँ कुछ उससे हटकर हुआ। मैं उसे पीछे नहीं धकेल पाया, बल्कि हुआ ये कि मैं उसके अंदर समाता चला गया। अब मैं उसके शरीर के अंदर था। जहाँ एक बहुत बड़ी जगह थी। इतनी बड़ी कि मैं वैसा कुछ कल्पना भी नहीं कर सकता था। फिर मुझे उस ठंडक के बीच ज़बरदस्त उष्मा महसूस हुई। मैं फौरन समझ गया कि यह उष्मा मिस स्काइ की जादुई छतरी से निकल रही थी। जैसे-जैसे गरमी बढ़ी, वह जगह काले से नीले रंग में बदलने लगा। तब मुझे एक बेहद हैरान कर देने वाली चीज दिखी। मुझे उस नीले रोशनी का स्रोत नजर आया। मैं उसकी ओर बढ़ा, करीब, और करीब और फिर उस रोशनी के बेहद पास। यह पत्थर जैसी कोई चीज थी। काफी ठंडी और नीले से भी ज्यादा नीला। इतना तो मैं समझ ही चुका था कि यह कोई मामूली पत्थर नहीं था। मैंने उसे उखाड़ने की कोशिश की चाहा और मेरे ऐसा करते ही वह पूरा स्थान, जो गौड्रिल के शरीर के अंदर स्थित था बुरी तरह से हिलने लगा। मानो किसी तरह का भूचाल आया हो। एक सरसों के दाने से भी छोटा हिस्सा, टूट कर मेरी हाथों से चिपक गया और वहाँ फिर से अंधेरा छा गया। अगली चीज जो मैंने महसूस की वह फिर से मेरा फेका जाना था। मैं बहुत तेजी से गौड्रिल के शरीर से बाहर आया और मिस स्काइ के बिल्कुल पास आकर गिरा। मुझे कोई चोट नहीं आई। और अगली चीज जो मेरी नज़रों में आई वह यह थी कि वे सभी गौड्रिल, जूना के शरीर में समाकर गायब हो रहे थें। फिर यकायक जूना का शरीर भी सिकुड़ता चला गया और वह भी गायब हो गई। वह अपने ही शरीर में समाकर गायब हो गई थी। युद्ध खत्म हो गया था।

‘मुझे दुख है कि तुम मारे गए लड़के।’ मिस स्काइ ने कहा और वे कमरे से बाहर चली गईं। वहाँ शोभा अब भी रो रही थी। मेरा बेटा अब भी उसका पल्लू पकड़े खड़ा था और शोभा को आवाजें लगा रहा था। बैनी अब भी शोभा के पास बेहद खामोशी से बैठी थी। जूलियट ठीक वैसे ही मूर्छित पड़ी थी जैसा मैंने उसे घंटे भर पहले देखा था। बैनी की बहू और वह वह छोटा सा लड़का, जिसका नाम मैं नहीं जानता था, वे अब भी चुपचाप एक कोने में खड़े थें।

‘तुम्हें अपने पति की चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं उसे ले आऊंगी।’ मिस स्काइ ने शोभा से कहा।

शोभा और जोरों से रोते हुए उनके पैरों पर गिर पड़ी। मिस स्काइ ने उसे उठाया और कौशल को अपनी गोद में ले लिया। उन्होंने अपने बस्ते में से कुछ बाहर निकाला, जो कि लकड़ी के बुरादे जैसा लग रहा था। उन्होंने उसे जूलियट पर डाला और वह अगले ही पल लाल आग की लपटो में समाकर गायब हो गई। फिर उन्होंने एक अजीब सी गुड़िया बाहर निकाली और उसे ज़मीन पर फेक दिया। उसपर भी उन्होंने जादुई बुरादे को छिड़का और वह भी लाल आग की लपटो से प्रज्ज्वलित हो उठी।

‘बैनी तुम इसमें जाकर इन्हें बताओ कि यह कैसे किया जाता है।’ मिस स्काइ ने कहा।

बैनी उठी और उस आग की लपटों में जाकर खड़ी हो गई। एक हल्की सी गर्जना हुई और बैनी देखते ही देखते वहाँ से गायब हो गई। फिर सब ने ऐसा ही किया।

‘क्या आप उन्हें सच में ले आएँगी?’ जाने से पहले शोभा ने पूछा।

‘मेरा विश्वास करो और अब जाओ।’ मिस स्काइ ने शोभा को समझाया।

फिर उन्होंने मेरे मृत शरीर पर बुरादे का छिड़काव किया और मैं भी या फिर मुझे कहना चाहिए मेरा मृत शरीर भी वहाँ से गायब हो गया।

अंत में मिस स्काइ ने सातवें आयाम के दरवाज़े को बंद किया, फिर हम उन आग की लपटों में दाखिल हुए और एक भंवर की धार में तेजी से बहते चले गए। कुछ मिनटों में मैंने खुद को एक अपरिचित कमरे में पाया, जिसमें बड़ी ही अनोखी मोमबत्ती जल रही थी। असल में वह दो पैरों पर चलने वाली मोमबत्ती थी।

                                                                                                                                        जारी है…              

Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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