2. मैं फिर से दिखने लगा

हम अब भी उस कमरे में मौन खड़े थे। वह दो पैरों पर चलने वाली मोमबत्ती बोलना भी जानती थी और कहना मानना भी। उसका कद 3 फूट होगा। उसकी आवाज़ पतली और सुरीली थी। अच्छा होगा कि मुझे यह कहना चाहिए कि वह बीच-बीच में गा कर अपनी बात कहती थी। मिस टोलस्काइ के आदेश का पालन करते हुए, वह मोमबत्ती हमें उस अजीब से दम घोटू कमरे से बाहर दूसरे कमरे में ले आई। अब-तक मुझे अंदाजा हो गया था कि हम किसी साधारण जगह पर नहीं थे। क्योंकि एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते वक्त हमें कई जादुई चीजें नजर आईं। हमने देखा कि घर में वह मोमबत्ती ही इकलौती अनोखी चीज नहीं थी। उदाहरण के लिए मुझे उन बरतनों का ज़िक्र करना पड़ेगा, जो स्वयं खुद को साफ करके, बर्तन रखने वाली जगह पर जाकर बैठ जाते। फिर उन झाडूओं के बारे में कहना तो बनता ही है। वे चारों एक कोने में खड़ी होकर हमारी बातें कर रही थीं। मैंने उनमें से एक को बोलते हुए सुना ‘क्या यह कोई धर्मशाला है, जो इतने सारे लोग एक साथ यहाँ रहने के लिए चले आए। अब तो हमारी मेहनत और भी बढ़ गई है। न जाने ये लोग इस बात को समझते है भी या नहीं!’ खैर हमने और भी कई जादुई चीजें देखी, जब-तक हम उस कमरे में न पहुँच गए, जो पूरी तरह से खाली था और उसमें दो त्रिकोण खिड़की बनी हुई थी। जिससे मैंने बाहर देखने की कोशिश की। शाम ढलने वाली थी और बची हुई रोशनी, किसी भी पल अंधेरे में विलीन हो जाने वाली थी। मेरी आँखों के सामने घना जंगल था। फिर मेरी नजर उन छोटे-छोटे पत्थरों पर पड़ी, जो घर के सामने कुछ ऐसे बिछीं थी, मानो उन्हें जान-बूझ कर, वहाँ उस तरह से रखा गया हो।

‘क्या हम विंडविज में हैं?’ मैंने पूछा।

मगर कोई जवाब नहीं आया।

ओह… मैं तो भूल ही गया था कि मैं मर चुका हूँ। पर मेरा शरीर कहाँ है? और शोभा कहाँ है? मेरा बेटा भी मुझे कहीं नजर नहीं आ रहा। फिर मैं मिस स्काइ से उनके बारे में पूछने के लिए मुड़ा और हैरानी की बात थी कि वह भी वहाँ नहीं थी।

मैं कमरे से बाहर निकला और उन्हें ढूंढने की कोशिश करने लगा। मैं एक कमरे से दूसरे कमरे में गया। मगर वे लोग मुझे कहीं नजर नहीं आए। तभी मुझे उस अंधेरे कमरे में एक तहख़ाना नजर आया। मैंने उसके ऊपर लगे दरवाज़े को हटाया और तहखाने में दाखिल हुआ। जब मैं सीढ़ियों से होकर नीचे उतर रहा था, तब मुझे तहखाने में कुछ आवाजें सुनाई देने लगी थी। नीचे पहुँचा तो मुझे वहाँ एक और दरवाज़ा नजर आया, जो सीधा बाहर की ओर जाता था। दरवाज़े से बाहर निकलने पर पता चला कि मिस स्काइ, मेरे बेटे और मेरी पत्नी के साथ वहाँ मौजूद थी। वे लोग किसी चीज को जला रहे थे। शायद वह मेरा मृत शरीर था। शोभा अब भी रो रही थी। मैं आहिस्ता-आहिस्ता उनकी ओर बढ़ा। मिस स्काई को शायद मेरे वहाँ होने की अनुभूति हो गई थी। उन्होनें कनखियों से मेरी तरफ देखा और पुनः सामने देखने लगी। मैं बहुत ही बुरा महसूस कर रहा था। मेरा बेटा उन आग की लपटों को ऐसे देख रहा था, जैसे वह उस ठंड के मौसम में राहत पहुँचाने वाली कोई चीज हो। हाँ, इस बात से भला क्या इंकार करना कि उस छोटे से बच्चे को उन आग की लपटों में जल रहे उसके पिता के शरीर से क्या फर्क पड़ता होगा। शायद अब-तक तो उसे मैं भी याद नहीं होऊंगा। मगर उसकी आँखों में आँसू थे। शायद वह अपनी माँ को रोता देखकर रो रहा होगा। वैसे मुझे एक बात की खुशी अवश्य थी कि यह पूरा आयोजन मेरे लिए ही तो था। भले ही इसमें बहुत कम लोग शामिल थें, फिर भी मुझे इस बात की प्रसन्नता थी कि मैं उन लोगों को मेरे लिए रोते हुए देख पा रहा था। यह मेरे प्रति उनका प्यार ही तो था। खैर, जब सब कुछ जल चुका था, तब वे मेरी राख को समेटकर वहाँ से थोड़ी आगे, एक नदी की ओर बढ़ चले।

‘इसका नाम वाइट रिवर है।’ मेरे पीछे से आवाज़ आई।

मैं फौरन चौंककर मुड़ा। वहाँ एक और महिला खड़ी थी। उनकी भी वेशभूषा मिस स्काइ से मेल खाती थी। पर उनका चेहरा काफी अजीब था। उनकी आँखें छोटी थी, जो उनके लंबे पतले से चेहरे पर और भी छोटी नजर आती थी। उनकी नाक बेहद लंबी और चिकनी थी। उसपर काफी सारा तेल जमा था। पर वह मिस स्काइ जितनी गंभीर नजर नहीं आती थी। उनके होठों को देखने पर ऐसा लगता था जैसे वह हर पल मुस्कराती रहती हों। साफ और स्पष्ट शब्दों में कहूँ, तो यह एक ऐसा चेहरा था, जो कोई भी एकबार देख ले, तो कभी न भूले।

‘मेरा नाम माँरफीन बेल है। मैं मिस टोलस्काइ के साथ काम करती हूँ। वैसे वह मुझे अपने साथ कहीं लेकर नहीं जाती, फिर भी घर के कामों में उनकी मदद करना, उनके साथ ही काम करने जैसा हुआ।’ वह मुस्कुराते हुए बोली।

‘क्या आप मुझे देख सकती हैं?’ मैंने हैरान होकर पूछा।

‘नहीं।’ उन्होंने कहा।

‘तो फिर आपने मेरे यहाँ होने का अंदाजा कैसे लगाया?’ मैंने पूछा।

‘मैंने महसूस किया और बोल पड़ी। मैं जानती हूँ कि वे लोग तुम्हारे शरीर को जला रहे थें।’ उन्होंने कहा।

‘क्या आपको मिस स्काइ ने बताया?’ मैंने पूछा।

‘नहीं।’ वह बोली। ‘वे कभी किसी को कुछ नहीं बताती। जब-तक वे यह जरूरी न समझे कि उसे बताना चाहिए। मैं तो यहाँ से गुजर रही थी, तो मुझे अजीब से दुख की अनुभूति हुई और मैं फौरन समझ गई कि यहाँ उस व्यक्ति की आत्मा है, जिसे अभी-अभी जलाया गया है।’

‘सच कहूँ तो मैं इतना भी दुखी नहीं हूँ।’ मैंने कहा।

‘हाँ, आत्माओं के साथ ऐसा ही होता है। जब हम जीवित होते है, तो हम दुखों को अपने भीतर महसूस करते हैं, परंतु मरने के बाद वही दुख आसपास भी प्रकट होने लगता है। तुम्हें निस्संदेह वह दुख थोड़ा ही महसूस होता होगा पर तुम्हारे आसपास के लोग उसे महसूस कर सकते है। कुछ आत्माओं या भूतों को ऐसा करना पसंद है। वे अपने दुखों को जानबूझकर डरावनी शक्ल देकर, आसपास प्रकट होने देते है। वे ऐसा जीवित लोगों को डराने के लिए करते हैं।’ उन्होंने कहा।

जब वे लोग मेरी अस्थियों का विसर्जन कर रहे थें, तब मेरे मन में एक और प्रश्न उठ खड़ा हुआ।

‘आप मुझे नहीं देख सकती और ना ही गौड्रिल मुझे देख पा रहे थें। फिर मिस स्काइ मुझे कैसे देख पा रही हैं?’ मैंने पूछा।

मिस माँरफीन थोड़ा मुस्कराई और कहा- ‘वह सब कुछ देख सकती हैं। माफ करना मुझे यह नहीं कहना चाहिए, फिर भी तुम तो उनके सामने बहुत छोटी सी चीज हो, वह उन चीजों को भी देख लेती है, जो अलौकिक है। तुम समझ रहे हो ना मैं क्या कहना चाहती हूँ। अलौकिक से मेरा मतलब है कि जो इस लोक में ही मौजूद नहीं है।’

मैंने देखा कि वाइट रिवर का सफेद पानी पहले लाल रंग में बदला और फिर काला हो गया। सूर्यास्त हो चुका था और आसमान में तारे टिमटिमाने लगे थें। शोभा कौशल को लिए वापिस घर की ओर चल पड़ी। मिस स्काइ मेरे करीब आई। वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं और माँरफीन से कहा कि मुझे घर लेकर जाएं। वह कुछ पल वहीं रूकना चाहती थी।

तकरीबन घंटे भर तक मैं उस दम घोटू कमरे में मिस माँरफीन के साथ खड़ा रहा। मैं नहीं जानता क्यों, पर मुझे वहाँ रहने में परेशानी हो रही थी। जब मेरी व्याग्रता और बढ़ी, तब मैंने पूछ ही लिया ‘मिस माँरफीन- मेरा शरीर जल क्यों रहा है?’

‘यह एक पवित्र कमरा है, जिससे तुम्हारी आत्मा को तकलीफ़ पहुँचती होगी। पर चिंता की कोई बात नहीं, यह एक अच्छा संकेत है।’ उन्होंने कहा।

‘अच्छा संकेत है! मैं कुछ समझा नहीं।’ मैंने हैरान होकर कहा।

‘असल में मिस स्काइ तुम्हें फिर से प्रकट करना चाहती है, ताकि तुम सभी को दिखाई देने लगो। तुम्हारे लिए यहाँ खड़े रहकर इन परेशानियों का सामना करना बेहद जरूरी है। यह तुम्हें उस तकलीफ़ को सहने के काबिल बना देगा, जो तुम्हें प्रकट करने के दौरान सहनी पड़ेंगी।’ मिस माँरफीन ने कहा।

‘कैसी तकलीफ़?’ मैंने पूछा।

‘तुम्हारी आत्मा बुरी तरह से जलने वाली है, ठीक वैसे ही जैसे आग में खड़े रहने पर होता है।’ उन्होंने बताया।

यह सुनकर मेरी घबराहट और ज्यादा बढ़ गई। एक समय तो मेरी बेचैनी इतनी बढ़ गई थी कि मैं वहाँ से जल्दी से जल्दी बाहर भाग जाना चाहता था। अच्छी बात यह रही कि कुछ घंटो में मैं फिर से बेहतर महसूस करने लगा।

तभी मिस स्काइ वहाँ आ पहुँची। ज्यादा समय नहीं बर्बाद करते हुए, उन्होंने फौरन ज़मीन पर एक गोल घेरा बनाकर, उसके अंदर चार लकीरें खींच दी। फिर उन्होंने मुझे दूसरे और तीसरे लकीर के बीच में खड़े होने को कहा।

मैंने वैसा ही किया और इसके फौरन बाद वह घेरा पूरी तरह से जल उठा। अभी तक मुझे उन आग की लपटों से कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा था। फिर मिस स्काइ ने उन लपटों में कुछ फेका। शायद वे किसी फूल की पंखुड़ियाँ थी। जिससे वे लपटें एकदम से गहरे बैगनी रंग में बदल गए और मुझे भीषण जलन और गरमी महसूस होने लगी। मैंने देखा कि वे चार लकीरें जो मिस स्काइ ने घेरे के अंदर खींची थी, वे पहले चमकीले धातु में बदला और फिर तरल में बदलकर मेरे शरीर में समा गया। फिर धीरे-धीरे मेरी आत्मा प्रकट होने लगी। मैं यह सब महसूस कर पा रहा था। शायद उस तरल से मेरी आत्मा, पारदर्शी से दिखाई देने लायक बनने लगी थी। अंत में मिस स्काइ ने उस बर्फ से भरे बाल्टी पर अपने छाते से जादू किया और वह हवा में ऐसे उठा जैसे उसका सारा गुरुत्वाकर्षण खत्म हो गया हो, फिर वह बेहद तेजी से गोल घेरे में दाखिल हुआ, जिससे एक हल्का धमाका हुआ और मेरे सामने जलती आग गायब हो गई और मैं फिर से अच्छा महसूस करने लगा।’

“स्वागत है तुम्हारा।” मिस स्काइ ने कहा और बाहर चली गई।

मैं फिर से दिखने लगा था। मिस माँरफीन ने मुझे कुछ बातें समझाई। उन्हें नियम कहना ज्यादा सही होगा। जैसे दूसरे प्रेतों से कम संपर्क रखना, किसी को भी बेवजह परेशान नहीं करना। अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं करना और सबसे जरूरी बात जीवित लोगों से संपर्क न करना। मुझे उन्हीं लोगों से मिलने की अनुमति थी, जो मुझे अच्छी तरह से जानते थें और मुझसे मिलना चाहते थें। मैं सच में बहुत खुश था। मेरी खुशी उस पल और बढ़ गई, जब शोभा उस कमरे में आई। उसने दौड़कर मुझे गले लगाना चाहा, पर वह ऐसा नहीं कर सकी।

‘तुम इसे छू नहीं सकती बच्ची। आखिर यह है तो एक आत्मा ही। तुम इसे भूत कहो या फिर प्रेत। तुम्हारी मरज़ी।’ मिस माँरफीन ने शोभा से कहा।

मुझे समझ में नहीं आया कि आखिर कौशल मुझे देखकर इतना क्यों रो रहा था। जब मैंने उसे गोद में उठाना चाहा, तब वह और जोरों से रोने लगा। मैंने शोभा को हैरान होकर देखा, जिससे उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट खिल उठी।

‘तुम मुस्कुरा क्यों रही हो?’ मैंने पूछा।

तब शोभा ने बताया कि मेरे पूरा शरीर सफेद हो गया है, जैसे मेरे ऊपर सफेद पाउडर की बारिश हुई हो।

मैं समझ गया कि कौशल इसी वजह से रो रहा था। ‘क्या मैं डरावना दिख रहा हूँ?’ मैंने शोभा से पूछा।

शोभा पुनः मुस्कुराई और बोली ‘इतने कि कोई भी देखकर हँस पड़े।’

यह सुनकर हम दोनों ज़ोरो से हँस पड़े। मिस माँरफीन भी हँसने लगी थी और कौशल भी मुस्कुरा पड़ा।

तब मैंने इस बात को महसूस किया कि –

“हम चाहे जिस भी हालत में हो, हमें सच्चा प्यार करने वाले हर स्थिति में हमें अपना लेते है और हमारे उदास मन को फिर से ख़ुशियों से भर देते है।”

जारी है…

***   

Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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