जिन्न से मुलाकात

उन दिनों गरमी का मौसम था और रात में हम सब परिवार छत पर चाँद-तारों के नीचे सोया करते थें। जब आसमान से होती हुई ओस की बूंदे मेरे गद्दे पर पड़ती और रात भर में उसे शीतल कर देती, फिर ठंडी हवाएँ धीरे-धीरे मेरे शरीर को गुदगुदाते हुए एक सुकून का अनुभव करवाने लगती, तब छत पर सोने का आनंद दुगना हो जाता था। तारों को देखते-देखते कब आँख लग जाती, यह बता पाना मेरे बस की बात नहीं। उन दिनों मैं तेरह-चौदह साल का रहा होऊँगा। अब इस उम्र में जब हमें कुछ अच्छा लगने लगता है, तब हमारी उत्सुकता उस काम के प्रति और भी बढ़ जाती है। ऐसी ही उत्सुकता में मैं एक रात जल्दी ही भोजन करके, छत पर सोने चला गया। मेरी तत्परता इसलिए भी थी क्योंकि मैं उस तारे को देखना चाहता था, जो आसमान में सबसे ज्यादा चमकता है। वह उन तमाम तारों में से मेरा सबसे प्रिय तारा था और शायद आज भी है। कुछ समय के बाद परिवार के बाकी सदस्य भी छत पर सोने आ गए। हमेशा की तरह तारों को देखते-देखते मेरी आँख लग गई।

हमारा छत काफी लंबा-चौड़ा है और छत की रेलिंग से सटे, फूल-पौधों के लिए गमले बने हुए हैं। वहाँ तरह-तरह के खुशबूदार फूल लगे हुए हैं। जैसे मैगनोलिया, गुलाब, गंधराज, रजनीगंधा, चमेली और भी न जाने कितने फूलों से हमारा पूरा छत रंग-बिरंगे खुशबुओं से महक उठता था। मेरी कोशिश यही होती थी कि मैं उन खुशबूदार फूलों के करीब सो सकूँ। जितना पास हो सके उतना पास। मगर मेरी माँ हमेशा मुझे रात में उन फूलों के करीब जाकर सोने से रोकती थीं। फिर भी मैं अपना बिस्तर गमले के पास ही लगाता था। और जब सुबह होती तो मैं खुद को अपने बिस्तर के साथ, उन गमलों से दूर पाता। ऐसा हर गरमी के मौसम में होता। यह बात मैंने अपनी माँ को नहीं बताई कि मुझे यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता कि वे हर रात मेरे सो जाने के बाद मेरा बिस्तर फूलों से दूर कर देती हैं।

बहरहाल उस रात एक हल्की सी सरसराहट से मेरी आँख खुल गई। आसमान में घोर अंधेरा था और चाँद की रोशनी भी बादलों के पीछे से लूका-छुपी का खेल, खेल रही थी। खैर मैं करवट बदलकर गमले की तरफ मुड़ा और मुझे वहाँ काली  परछाई दिखी। मैंने अपनी आँखों पर जोर दिया और तब मैंने देखा कि असल में वह परछाई नहीं, बल्कि कोई औरत थी जिसने काले कपड़े पहन रखे थें। वह फूलों के पास चुपचाप बैठी हुई थी। फिर उसने अपने पैर फैलाए और उसकी लंबाई बढ़ती गई। जिससे मेरा बिस्तर उस गमले से दूर होता गया। मैं तब भी नहीं समझ पाया था कि आखिर हो क्या रहा था। पर मैं इतना अवश्य जानता था कि यह कोई सामान्य बात नहीं थी। फिर अचानक ही बादलों के पीछे से चाँद बाहर निकल आया और महज एक क्षण के लिए मेरी नजर उसपर पड़ी और उसी पल उसने मुझे भी देखा। वह कोई औरत नहीं थी और ना ही वह कोई मर्द दिखता था। शायद वह एक ऐसा प्राणी था, जिसे आप जिस भी रूप में देखना चाहे, आप उसे देख सकते थें। उस समय मैं इतना ज्यादा डर गया था कि मुझे उसका चेहरा भयानक नजर आने लगा। वह उठा और मेरी ओर बढ़ने लगा। उसकी लंबाई बारह फूट या फिर उसके आस-पास तो अवश्य ही रही होगी। मेरी सांसे थम गईं और आवाज़ गले में ऐसी अटकी कि मैं चिल्लाना तो दूर, चिल्लाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सका। उसी पल चाँद फिर से बादलों के पीछे जा छुपा और अंधेरा होते ही वह काले धुँए में बदलकर, बादलों से जा मिला। फिर उस रात मुझे नींद नहीं आई।

अगली सुबह मैंने यह किस्सा अपने परिवार वालों और दोस्तों को बताया। कुछ के लिए यह एक अनोखी कहानी थी, तो कुछ ने मुझे और मेरी बातों को यह कहकर रफा-दफा कर दिया कि “तुमने कोई सपना देखा होगा।” परंतु मेरी बहन जो मुझे अक्सर भूतों और प्रेतों की कहानियाँ सुनाया करती थी, ने बताया कि वह ना ही कोई चुडैल थी और ना ही कोई भूत-प्रेत। असल में मैं जिस प्राणी से उस रात मिला था वह एक जिन्न था। जो हर रात उन फूलों की खुशबू सूंघने वहाँ आया करता था। और शायद अब भी आता होगा। क्योंकि उस दिन के बाद से आज-तक हमारे गमले के फूल नहीं मुरझाए। वे सभी फूल पूरे साल खिले रहते हैं। फिर चाहे उनके खिलने का मौसम हो या ना हो।

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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