गधे और धोबी की कहानी

एक समय की बात है, एक गाँव में एक धोबी रहा करता था। उसके पास एक गधा था। वह उस गधे की देखभाल करने के लिए जो बन पड़ता वह करता। उसे समय पर चारा देता, उसे नहलाता और उसकी मालिश भी करता। बदले में वह गधा ढ़ेर सारे कपड़ों की गठरी को अपने पीठ पर लादकर नदी तक ले जाता और जब वह धोबी कपड़े साफ कर लेता और उन्हें सूखा लेता, तब वह फिर से उन कपड़ों की गठरी को अपनी पीठ पर लादकर धोबी के घर तक ले आता। वह ऐसा प्रतिदिन किया करता था।

एक दिन धोबी के पास धोने के लिए ढ़ेर सारे कपड़े आ गए। उन्हें धोकर साफ करने और सूखाने में शाम हो गई। धोबी बुरी तरह से थक गया था। इसलिए उसने जल्दी-जल्दी कपड़ों की गठरी बनाई और एक-एक कर गधे पर लादता गया। इसके बाद वह थका हारा खुद भी गधे की पीठ पर बैठ गया और अपने घर की ओर चल पड़ा। कपड़ों और धोबी के बोझ से वह गधा तेज नहीं चल पा रहा था।

जब वे दोनों मुख्य सड़क पर पहुँचे, तब उन्हें लोग मिलने शुरू हो गए। उन्हीं लोगों में से किसी एक को धोबी ने कहते हुए सुना-

“कितना कठोर इंसान है। एक तो इसने मासूम गधे पर इतना बोझ लाद रखा है, ऊपर से खुद भी बैठा हुआ है। इसे गधे की जरा भी फिक्र नहीं है।”

यह सुनकर वह फौरन नीचे उतर गया और थका हारा पैदल चलने लगा। जब वह धोबी अपने गधे के साथ कुछ और आगे बढ़ा, तब उसने किसी को कहते हुए सुना-

“कितना कठोर इंसान है। एक बेचारे गधे पर कितना बोझ लाद रखा है।”

जब धोबी के कानों में यह बात पड़ी तब उसने फौरन कपड़ों की कुछ गठरियों को उठाकर अपने पीठ पर लाद लिया। वे दोनों कुछ और आगे बढ़े। तब धोबी ने किसी को यह कहते हुए सुना-

“कितना मुर्ख इंसान है। गधा पास होते हुए भी इसने कपड़े अपने पीठ पर लाद रखे है।”

यह सुनकर धोबी ने सारे कपड़े गधे की पीठ पर रख दिये और लोगों की बातों को अनसुना करते हुऐ चुपचाप अपने घर की ओर बढ़ चला।

निष्कर्ष:

“एक व्यक्ति के विचार दूसरे से अलग होते हैं। सब की बातों को सुनकर उसपर अमल करना मुश्किल है। इसलिए लोगों के कहे में न आकर वही कीजिए जो आपको सही लगता है।”

***

Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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