ग्रीन-टी पीने के सात अनमोल फायदे

चाय पीने की आदत औसतन सभी मनुष्यों में होती है और यह सभी को पसंद भी है। चाय हमारी थकावट को दूर भगाकर हमें फिर से तरोताज़ा कर देती है। पर क्या आप जानते हैं कि आप अपने पसंद में थोड़ा बदलाव करके एक स्वस्थ शरीर पा सकते है।

ग्रीन-टी

ग्रीन-टी हर मायनों में चाय पीने वालों के लिए अमृत है। इसमें भारी मात्रा में ऐन्टीआक्सिडन्ट और नूट्रीअन्ट होते है, जो हमारे शरीर के भीतर जाकर अलग-अलग तरह के विषैले तत्व को न सिर्फ खत्म करता है बल्कि उसे हमारे शरीर से बाहर भी निकाल देता है।

इसके अलावा – दिमाग को तरोताज़ा करना एवं तंदरुस्त बनाना, अनावश्यक चरबी को घटाकर वजन कम करना, स्किन संबंधी छोटी-मोटी समस्याओं को दूर करना एवं उन्हें ताज़ा बनाए रखना और कैंसर से बचाव करना ग्रीन-टी की ख़ासियत है।

नोट :- [ग्रीन-टी का सेवन कभी खाली पेट न करें और ना ही इसमें दूध/चीनी का प्रयोग करें]

1. ग्रीन-टी कैसे कैंसर से बचाव करता है?

ग्रीन-टी के पत्तियों में बायोएक्टिव कम्पाउंड पाए जाते है। इसमें लगभग 30% पोलीफेनोल होता है साथ ही साथ इसमें काफी मात्रा में कैटेचिन पाई जाती है, जिसे EGCG [Epigallocatechin-3-gallate] कहते हैं। अब हम वैज्ञानिक भाषा को छोड़कर, इसे सरल भाषा में समझते है। EGCG ताक़तवर प्राकृतिक ऐन्टीआक्सिडन्ट होता है, जो हमारे शरीर के भीतर जाकर कोशिकाओं [Cell] को नष्ट होने से रोकता है और उन्हें मजबूत बनाता है। यह कैंसर से संक्रमित कोशिकाओं को पनपने से रोकता है और खतरनाक ट्यूमर को भी फलने-फूलने नहीं देता। क्योंकि यह कोशिकाओं को स्वस्थ बनाता है इसलिए ऐसे खतरों के फैलने का कम अवसर होता है।

यह शरीर में अनावश्यक बनने वाले मुक्त मूलक [Free Radicals] को समय के साथ दूर कर देता है।

ग्रीन-टी का सेवन करते रहने से कैंसर होने की संभावना 20 से 30% घट जाती है।

मुक्त मूलक यानी कि “Free Radicals” क्या है?

यह हमारे शरीर में भोजन करने के बाद पैदा होने वाली बेकार की चीजें है, जो शरीर को समय से पहले बूढ़ा और दिल को कमजोर बना देती है। इससे कैंसर फैलने का भी डर बना रहता है। इसलिए ग्रीन-टी का नियमित सेवन करते रहने से हम इन बिमारियों को पनपने से पहले ही खत्म कर सकते है।

EGCG कैंसर से संक्रमित कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। इसलिए भी ग्रीन-टी पीना फायदेमंद है। इसके अलावा यह कैंसर से संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट भी करता है।

2. ग्रीन-टी दिमाग के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है-

अगर आप कैफीन के शौकीन हैं, तब आपको जानकर खुशी होगी कि ग्रीन-टी में पाई जाने वाली कैफीन आपके सेहत को बिना नुकसान पहुँचाए, आपके दिमाग को प्रकृतिक तरीके से तरोताज़ा कर देता है जिससे आप बेहतर ढंग से काम करने लगते है। यही नहीं यह आपके शरीर के थकावट को दूर भगाने में कारगर है। ग्रीन-टी के पास कॉफी जितना कैफीन तो नहीं होता, मगर इतना अवश्य होता है जिसे पीने के बाद आप तरोताज़ा महसूस करने लगेंगे। यहाँ ग्रीन-टी से संबंधी एक बात ध्यान देने वाली है कि आप इसका सेवन दिन भर में दो से तीन कप तक ही करे। ज्यादा ग्रीन-टी का सेवन करना भी शरीर के लिए हानिकारक है। इसे खाली पेट पीना आपके शरीर के लिए और भी ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है।

3. ग्रीन-टी पीने से मोटापा कम होता है-

ग्रीन-टी आपके शरीर के अनावश्यक चरबी को कम करके आपको पुनः चुस्त और तंदरुस्त बना देता है। इसे पीने के बाद आपका पूरा शरीर सक्रिय हो जाता है। ऐसा इसमें मौजूद कैफीन की वजह से होता है। यह आपके सुस्ती को कम कर देता है, जिससे आप ज्यादा शारीरिक श्रम करने लगेंगे और आपका मोटापा दुगनी तेजी से कम होने लगेगा।

4. ऐन्टीआक्सिडन्ट-

ग्रीन-टी ऐन्टीआक्सिडन्ट का सबसे अच्छा स्रोत है। यह आपके शरीर में खाने के बाद पैदा होने वाली हर बेकार चीजों को समाप्त करने में सक्षम है। जिससे कैंसर के खतरों से बचा जा सकता है। जब शरीर के भीतर Free Radicals नहीं होंगे, तब कई तरह के बिमारियों से अपने आप निजात प्राप्त हो जाता है। इसके अलावा इसका सबसे ज्यादा फायदा आपकी त्वचा को जवान बनाए रखने में भी है। ऐन्टीआक्सिडन्ट ग्रीन-टी की सबसे बड़ी ताकत है।

5. दाँतों के लिए भी फायदेमंद है ग्रीन-टी-

ग्रीन-टी में पाया जाने वाला EGCG दाँतों में पनपने वाले बैक्टीरिया या कीटाणु का भी सफाया कर देता है। जिससे दाँतों की उम्र अपने आप बढ़ जाती है। साथ ही साथ यह मुँह के अंदर के बैक्टीरियल ग्रोथ को भी रोक देता है।

6. टाइप 2 डायबिटीज़ वाले अवश्य ग्रीन-टी पिये-

टाइप 2 डायबिटीज़ में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और शरीर इन्सुलिन नहीं बना पाता। यह रोग पूरी दुनिया में लगभग 400 मिलियन लोगों को है। भारत में ही टाइप 2 डायबिटीज़ के रोगियों की भरमार है। ऐसे में ग्रीन-टी की उपयोगिता बढ़ जाती है, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को न सिर्फ घटाने में मददगार साबित होता है बल्कि यह शरीर को इन्सुलिन बनाने में भी मदद करता है। इससे टाइप 2 डायबिटीज़ के रोगियों को काफी मदद मिल जाती है।

7. ग्रीन-टी पीने से आयु बढ़ जाती है-

यह हृदय संबंधी समस्याओं को कम कर देता है। इसके साथ ब्रेन स्ट्रोक, कैंसर, टाइप 2 डायबिटीज़, मोटापे जैसे खतरों को कम करके हमारी आयु तो अवश्य ही बढ़ाता है।

ग्रीन-टी बनाने का सबसे अच्छा तरीका-

ग्रीन-टी गर्म पानी मे हरी चाय की पत्तियों को मिलाकर पीने में ही लाभदायक साबित होता है। इसमें दूध और चीनी मिलाने से हमेशा परहेज करना चाहिए। एक सबसे जरूरी बात यह है कि इसे कभी खाली पेट नहीं पीना चाहिए। खाने से एक या दो घंटे पहले या फिर एक या दो घंटे बाद इसे पीना लाभदायक होता है। हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम ग्रीन-टी का सेवन दिन भर में दो से तीन कप तक ही सीमित रखें।

निष्कर्ष:-

ग्रीन-टी का सेवन करके स्वस्थ शरीर पाया जा सकता है और बिमारियों को पनपने से पहले ही रोका जा सकता है। रोजाना दो से तीन कप इस चाय को पीने से और थोड़ा सा व्यायाम करने से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है।

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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1 Response

  1. 22 Nov 2018

    […] [नोट: ग्रीन-टी के और फ़ायदों के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।] […]

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