20 मई 2019 से किलोग्राम की नई परिभाषा लागू होगी

वैज्ञानिकों ने किलोग्राम की परिभाषा बदल दी है। 50 से ज्यादा देशों ने नई परिभाषा को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। अबतक किलोग्राम को प्लेटिनम से बनी एक सिल के वजन से परिभाषित किया जाता रहा है। इसे ‘ली ग्रैंड के’ कहा जाता है।

‘ली ग्रैंड के’ क्या है?

यह लंदन में बनी 90 प्रतिशत प्लेटिनम और 10 प्रतिशत इरिडियम से बना 4 सेंटीमीटर का एक सिलेंडर है। इसे 1889 से पश्चिमी पेरिस के इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स में बंद रखा गया है।

अब वैज्ञानिकों की माने तो वे इस बात का समर्थन करते दिखाई दे रहे है कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाए। क्योंकि इसमें गलती होने की कम संभावना है। अब-तक इसे फ़िज़ीकल ऑब्जेक्ट द्वारा परिभाषित किया जाता रहा है। इसमें गलती होने की संभावना ज्यादा है। क्योंकि फ़िजी़कल ऑब्जेक्ट आसानी से परमाणु को खो सकते हैं या हवा से अणुओं को अवशोषित कर सकते है। इससे तौलने या मापने में गलती हो सकती है। आम जीवन में भले ही हमें यह बदलाव न नजर आए, मगर अबतक वैज्ञानिक गणनाओं के लिए ये एक बड़ी समस्या रही है।

नया किलोग्राम

अब नए तरीके के अंतर्गत किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस का उपयोग करके मापा जाएगा।

क्या है किब्बल?

यह एक ऐसा उपकरण है (तराजू) जो यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा (करंट से संचालित होने वाला) का इस्तेमाल करके सटीक गणना करेगा।

इससे उद्योग और विज्ञान जगत पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। 16 नवंबर 2018 को फ्रांस के वर्साय में जनरल कॉन्फ़्रेंस ऑन वेट्स एंड मेजर्स में 60 देशों के प्रतिनिधियों ने वोट करके यह तय किया है कि अब किलोग्राम को प्लांक कॉन्स्टेन्ट के आधार पर मापा जाएगा। इसका मतलब है कि किब्बल तराजू का उपयोग करके जो करंट से संचालित होता है से किलोग्राम को परिभाषित किया जाएगा और इसे 20 मई 2019 को लागू कर दिया जाएगा।

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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