अलमारी में कौन छिपा बैठा है?

मेरा नाम रोहित है। मेरी शादी को हुए अब पाँच साल हो चुके है और अब मेरा एक बेटा भी है। हमने उसका नाम आकाश रखा है। वह तब दो साल चार महीने का हो चुका था, जब हमारे साथ यह घटना घटी।

आकाश ने बोलना शुरू कर दिया था। टूटी-फूटी शब्दों में वह अपनी बात कह देता था और उसके मासूम शब्दों को सुनकर किसी के भी चेहरे पर मुस्कान अपने-आप आ जाती थी। सचमें बड़े प्यार से वो अपनी बात कहता था। पर पिछले कुछ दिनों से मुझे किसी बात को लेकर बहुत चिंता हो रही थी। मेरा बेटे हर आधी रात को नींद से जाग उठता और वह कमरे में मौजूद अलमारी को देखकर जोर-जोर से रोने लगता था और कहता “वो मुझे नीचे गिरा देगा। मुझे मारेगा, पापा बचाओ, मम्मी बचाओ।” शुरू के दो चार दिन मुझे ऐसा लगा कि वह जरूर कोई सपना देखकर डर जाता होगा और मेरी पत्नी भी इस बात से सहमत थी। मगर प्रतिदिन ऐसा होते देखकर, मुझे कुछ चिंता होने लगी थी। चूंकि मैं हर छोटी से छोटी बात को गंभीरता से लेता था इसलिए मेरा चिंता करना जायज़ था।

एक दिन वह ऐसे ही अपनी मम्मी से पूछ पड़ा कि “मम्मी उस अलमारी में कौन रहता है?”

मेरी पत्नी पहले तो थोड़ा मुस्कराई और फिर बोली “बेटा उस अलमारी में कोई भी नहीं रहता।“

फिर उसने प्रश्न किया कि “तो फिर उससे आवाजें क्यों आती रहती हैं?”

“क्योंकि उसके ऊपर चूहे घूमा करते हैं।” मेरी पत्नी ने जवाब दिया।

वैसे यह बात सच ही थी। अलमारी के ऊपर वाकई चूहे घूमा करते थें। वे अक्सर रात में उसके ऊपर इतना हुड़दंग मचाते की हमें सोने में बहुत परेशानी होती थी। तब मेरे दिमाग में यह ख्याल आया कि शायद इसी वजह से मेरा बेटा रात में डर जाया करता होगा। तभी उसने कुछ ऐसा कहा कि मेरे पैर काँप उठे-

उसने कहा “और वह काला आदमी भी तो उसमें रहता है।”

मेरी पत्नी ने उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मगर मैं उसकी बातों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहता था। आखिर बच्चे कभी झूठी या बनावटी बातें नहीं करते।

उसी रात तकरीबन ग्यारह बजे मैं बाथरूम जाने के लिए उठा, तभी मेरी नजर आकाश पर पड़ी। वह हमलोगों के साथ ही सोता था। मैंने देखा कि वह आँखें खोले एकटक अलमारी को निहारे जा रहा था। मैंने अपनी नज़रें अलमारी की तरफ घुमाई और मैंने पाया कि उसका दरवाज़ा खुला हुआ था। मुझे थोड़ा डर तो अवश्य लग रहा था, तभी एक चूहा न जाने कहाँ से मेरी ऊपर आ गिरा और मेरे मुँह से चीख निकल पड़ी। मेरी पत्नी ने झट से कमरे की बत्ती जला दी और मेरी नजर पुनः अलमारी की तरफ गई। मुझे यह देख के बेहद हैरानी हुई कि अलमारी का दरवाज़ा बंद था।

“पर थोड़ी देर पहले तक तो अलमारी का दरवाज़ा खुला हुआ था।” मैंने मन ही मन सोचा।

“क्या हुआ तुम चिल्लाए क्यों?” मेरी पत्नी ने पूछा।

अभी मैं उससे कुछ कह पाता कि तभी आकाश जोर-जोर से रोने लगा और उसके मुँह से फिर से वही शब्द निकले “वो मुझे नीचे गिरा देगा। मुझे मारेगा, पापा बचाओ, मम्मी बचाओ।”

मेरी पत्नी ने उसे अपने गोद में उठाकर, उसे नींद से जगाया और उसकी बातों को नज़रअंदाज़ करते हुए बोली “कुछ नहीं हुआ तुम्हें, तुम ठीक हो। तुम्हारे पापा और मैं दोनों तुम्हारे साथ हैं।”

अगले दिन मैं अपने दफ्तर जाने की तैयारी में था। मैं उस अलमारी में से अपने कपड़े बाहर निकाल रहा था। न जाने क्यों मुझे उस अलमारी के पास खड़े होने पर अजीब सी ठंड महसूस हो रही थी। मुझे मेरे कपड़े ढूंढने में परेशानी हो रही थी और मैं ठंड की वजह से बुरी तरह से कांपने लगा था। तब तो भीषण गरमी का मौसम था और मुझे उस ठंड का कारण जरा भी समझ में नहीं आ रहा था तभी मैं उस अलमारी से भयानक तरीके से टकराया और नीचे गिर पड़ा। मुझे किसी ने पीछे से धक्का दिया था। मैंने देखा कि मेरे ठीक पीछे आकाश खड़ा था। देखने से ऐसा लग रहा था कि वह धक्का उसने मुझे दिया हो, मगर मुझे इतनी जोर से धक्का दे पाना कहीं से भी आकाश के बस की बात नहीं थी। और वह मेरी तरफ देख भी नहीं रहा था। उसकी नज़रें अलमारी पर टिकी थीं।

मैंने पूछा “वहाँ कौन है बेटा?”

उसने डरते हुए जवाब दिया “मैं इसी की बात तो कर रहा था। यही तो है वो जो अलमारी में रहता है।”

मैंने अलमारी की तरफ पुनः देखा परंतु मुझे वहाँ कोई भी नजर नहीं आया। “यहाँ तो कोई भी नहीं है।” मैंने आकाश से कहा। “वो कैसा दिखता है?” मैंने पूछा।

उसका पूरा शरीर काला है। और मुझे उससे बहुत डर लगता है।” यह बोलकर वह जोरों से रोने लगा।

मैंने आकाश को गोद में उठाया और उसे ना डरने की सलाह देते हुए कमरे से बाहर निकल आया। शाम को जब मैं दफ्तर से घर लौटा, तब मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही थी। उस दिन हम जल्दी ही खाना खा के सोने चले गए। देर रात मेरी नींद खुली। मैंने सुना कि कोई खुसफुसाकर बातें कर रहा था। मैंने बिस्तर के दूसरी तरफ अपनी नज़रें फिरायी। वहाँ आकाश पेट के बल बिस्तर से आधा नीचे लटका हुआ था। मेरी पत्नी गहरी नींद में थी। फिर मैंने देखा कि एक हाथ बिस्तर के नीचे से बाहर आया और आकाश के बालों को सहलाने लगा। यह मेरा भ्रम नहीं था। उसके हाथ जले हुए थे और नाखून लंबे और पैने थें। यह देखकर मैं काँप उठा। और तभी फिर एक झटके में उसने आकाश को बिस्तर के नीचे खींच लिया। मैं चिल्लाया पर आवाज़ मेरे गले में ही अटक गई और मैं उस भयानक सपने से जाग उठा। मैं सपना देख रहा था। मैंने बिस्तर पर लेटे-लेटे चैन की सांस ली और आकाश को देखने के लिए उठा। पर वह बिस्तर पर नहीं था। मैं हड़बड़ाहट में उठा और फौरन कमरे में अपनी नज़रें घुमाई। मैंने देखा कि आकाश उसी अलमारी के पास खड़ा था और किसी से बातें कर रहा था। उस अलमारी का दरवाज़ा आधा खुला हुआ था। इस बार मैं सपना नहीं देख रहा था। फिर मैंने एक लंबे, काले और बेहद डरावने हाथ को उस अलमारी से बाहर निकलते देखा। यह दृश्य मेरे सपने जैसा ही था। फिर एक आवाज़ आई बेहद मोटी और डरावनी –

“अब चलो मेरे साथ।”

“नहीं, मैं नहीं जाऊँगा।” आकाश ने डरते हुए कहा।

“तुम्हें कुछ नहीं होगा, बस थोड़ा सा दर्द होगा और फिर तुम हमेशा-हमेशा के लिए हमारे साथ रह सकोगे। मैं तुम्हें ढ़ेर सारे खिलौना भी दूँगा।” अलमारी से आती उस आवाज़ ने कहा।

“नहीं मैं तुम्हारे साथ नहीं चलूंगा। तुम बहुत डरावने हो।” आकाश ने रोते हुए कहा।

“क्या कहा तुमने।” उस आवाज़ ने गुस्से में कहा और एकदम से अलमारी से बाहर निकल आया।

वह तकरीबन बारह फूट का काला और भयानक प्राणी था। अब-तक आकाश इसी की बात करता हुआ आया था। उसने गुस्से में आकाश को मारने की कोशिश की, तभी मैं जोर से चिल्लाया और आकाश की तरफ दौड़ा। आवाज़ सुनकर मेरी पत्नी भी जाग उठी और उस बारह फूट के प्रेत को देखकर वह भी दहशत में आकर चिल्ला पड़ी। इतनी देर में मैंने आकाश को उस प्रेत से दूर कर दिया। वह प्रेत मेरे और आकाश की तरफ बढ़ने लगा। तभी मेरी पत्नी जोर-जोर से हनुमान चालीसा का वो श्लोक उच्चारण करने लगी- जिसमें लिखा है “भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे।” मैंने पहली बार इस मंत्र की शक्ति देखी क्योंकि मात्र तीन बार इस मंत्र का उच्चारण करने मात्र से ही वह प्रेत उसी अलमारी में जा घुसा।

अगले दिन हमने यह सारी घटना एक पंडित जी को बताई और उन्हें घर लेकर आए। उन्होंने घर के शुद्धीकरण के लिए हवन किया और उस अलमारी को घर से बाहर कर देने की सलाह दी। हमने वैसा ही किया, जैसा कि पंडित जी ने बताया था। पंडित जी ने उस अलमारी को जला डाला और उसके राख को गंगा नदी में विसर्जित कर दिया। और इस तरह से हमने उस प्रेत और शापित अलमारी से एक साथ मुक्ति पा ली।

***

Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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