ब्लडफॉल ग्रेव्यार्ड की कथा

थेम पार्क की जितनी प्रशंसा की जाए, उतना कम है। वह पार्क इतना बड़ा है कि उसे पूरा देखने के लिए हफ्तों जितना समय लग जाए। आस-पास के इलाकों से लेकर दूर देशों से लोग उस पार्क को देखने आया करते हैं। वहाँ मौजूद अद्भुत मूर्तियाँ, तरह-तरह के फूल-पौधे और नाना प्रकार के झूले इतने सुंदर और आकर्षक हैं कि किसी के मन में भी उन्हें दोबारा देखने की इच्छा अपने आप प्रकट हो जाती है। मगर वह विशाल पार्क बस इन्हीं चीजों के लिए प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि उस पार्क का केन्द्र बिंदु तो कुछ और ही है। एक विशाल कब्रिस्तान, जो कई सौ सालों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता हुआ आया है और मैं भी उसे देखने के लिए वहाँ गया था। गेट नंबर 113 से होकर उस कब्रिस्तान में सीधा पहुँचा जा सकता था। वहाँ तकरीबन तीन लाख या शायद उससे भी ज्यादा कब्रें थीं। हांलाकि अब वहाँ किसी को भी दफ़नाने की इजाज़त नहीं थी, फिर भी इतने सारे मरे हुए लोगों को एक साथ देखकर हड्डियों में जैसे सिहरन सी पैदा हो जाती थी। डर का ऐसा बादल सर पे मंडराने लग जाया करता था कि वहाँ से फौरन भाग जाने की इच्छा होने लगती। फिर भी उस कब्रिस्तान का आकर्षण और मन में उठने वाली जिज्ञासा रूकने पर मजबूर कर देती थीं। पर यह कैसी जिज्ञासा थी और कैसा रहस्य था, जिसने इतने सालों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया था। जहाँ तक उस कब्रिस्तान के बारे में मैंने सुना था, वहाँ किसी को भी रात के नौ बजे के बाद जाने की अनुमति नहीं थी। नौ बजने से पहले ही पार्क के उस हिस्से को बंद कर दिया जाता था और गेट नंबर 113 में ताला लगा दिया जाता था। शायद इसलिए भी उन लोककथाओं को बल मिल जाता था, जो सदियों से हमें डराते हुए आई थी और नटखट बच्चों पर नकेल कसने के लिए उनके परिवार वाले उन्हें सुनाया करते थें।

कथा कुछ ऐसी थी कि-

एक बार एक क्रूर राजा कई हजार सैनिकों को लेकर युद्ध करने निकल पड़ा और अब जहाँ वह थेम पार्क स्थित है, वहीं उसका सामना उसके दुश्मन से हुआ। युद्ध में उस क्रूर राजा के ढेरों सैनिक मारे गए। जब उसने देखा कि अब वह युद्ध नहीं जीत सकता, तब वह अपने सैनिकों को मरता हुआ छोड़कर, वहाँ से भाग खड़ा हुआ। खैर जीतने वाले राजा ने मरे हुए सभी सैनिकों को वहीं क़ब्रों में दफ़ना दिया और जाते-जाते उन मरे हुए लोगों को शाप दे डाला कि उन्हें मुक्ति तभी मिलेगी, जब उनका भगोड़ा राजा लौटकर यहाँ आएगा और अपने सैनिकों से माफी माँगेगा। तब से लेकर आजतक, हर रात उन क़ब्रों में से मरे हुए सैनिक बाहर आते हैं, इस इंतजार में कि एक दिन उनका राजा लौटकर आएगा और वे उसे मारकर अपने साथ उसी कब्र में शामिल कर लेंगे और फिर उन सभी को मुक्ति मिल जाएगी।

ऐसी ही एक और कहानी है कि रात में उस कब्रिस्तान में जाने वाला कोई भी शख्स जीवित नहीं बचा है। कहते हैं कि उन सैनिकों का भूत रात में जाने वाले लोगों को मारकर क़ब्रों में गाड़ देते है। और ऐसे कई किस्सों के सच होने के प्रमाण भी मिले हैं। कोई नहीं जानता कि उनलोगों को भूतों ने मारा है या फिर चोर-डाकुओं ने। पर एक बात तो मैं भी दावे के साथ कह सकता हूँ कि आज भी वहाँ अपने-आप नए क़ब्रों के बनने की घटना सामने आती रहती हैं और उन क़ब्रों में वाकई मरे हुए लोगों का शरीर होता है।

मेरा नाम जॉर्ज है और मुझे हमेशा से ऐसी बातें अपनी ओर आकर्षित करती हुई आई हैं। मैं अब-तक कई भूतिया जगहों पर जा चुका हूँ और वहाँ रात भर रूक भी चुका हूँ। परंतु सच पूछो तो मैं पहले कभी इतना डरा हुआ और उत्साहित नहीं था, जितना कि इस बार मैं महसूस कर पा रहा था। एक लंबी यात्रा करने के बाद आखिरकार मैं उस शहर में पहुँचा, जहाँ मौजूद था थेम पार्क। मेरी तैयारी और योजना पक्की थी। मेरी योजना दो भागों में बटी हुई थी। सबसे पहले मैं दिन के वक्त उस पार्क में जाकर उस जगह का मुआयना करने वाला था और फिर सुरक्षा घेरों की जाँच पड़ताल करने के बाद, मैं रात में कब्रिस्तान में जाने की योजना तैयार करने वाला था। इसी दौरान मुझे पता चला कि रात के नौ बजे के बाद गेट नंबर 113 के पास कोई सुरक्षाबल पहरा नहीं देता। यह मेरे लिए अच्छी खबर थी। मैंने इसका कारण जानने के लिए खुद सुरक्षाबलों से बात की और तब उन्होंने बताया कि रात में उन्हें कब्रिस्तान से अजीबोगरीब आवाज़ें आती सुनाई देती हैं। जैसे कि कोई दर्द से तड़प कर रो रहा हो। कुछ सुरक्षाबलों ने बताया कि रात में गश्त के दौरान उन्होंने कई बार कब्रिस्तान में किसी को घूमते हुए भी देखा है। सुरक्षाबलों को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वे झूठ बोल रहे थे। उनका दावा था कि उन्होंने भूतों-प्रेतों को अंदर घूमते हुए देखा है।

खैर सारी जानकारियाँ इकट्ठी करने के बाद मैं वापिस अपने होटल लौट पड़ा। अब मुझे रात होने का इंतजार था। मेरी योजना का दूसरा भाग अब शुरू होने वाला था।

रात ग्यारह बजे मैं एकबार फिर से अपने होटल से बाहर निकला। तकरीबन आधे घंटे तक पैदल चलते रहने के बाद मैं गेट नंबर 113 के पास पहुँचा। सुरक्षाबलों के न होने से मुझे उस ऊँचे गेट पर चढ़ने और फिर उसके पार जाने में कोई परेशानी नहीं हुई। हांलाकि उस गेट पर चढ़ना जोखिम भरा काम जरूर था। मगर मैंने ऐसे दर्जनों गेटों को पार किया होगा। खैर अब मैं थेम पार्क के अंदर दाखिल हो चुका था और मेरी आँखों के ठीक सामने मौजूद था ब्लडफॉल ग्रेव्यार्ड। जी हाँ यही नाम था उस कब्रिस्तान का। दहशत फिर से मेरे रोम-रोम में घर करने लगी थी। काँपते हुए मगर उत्साह में डूबे हुए कदमों के साथ, मैं एक पूरी रात उस कब्रिस्तान में बिताने के लिए आगे बढ़ा।

अभी ज्यादा देर नहीं हुई थी कि मेरे कानों में विस्मित कर देने वाली आवाज़ें आनी शुरू हो गई। मैंने पहले अंदाजा लगाया कि वे आवाजें लगातार बह रही हवाओं की वजह से आ रही होंगी, मगर जल्दी ही मेरा वह भ्रम टूट गया। मैंने अपने पैरों के नीचे मिट्टी खिसकते हुए महसूस की। मैं फौरन दो कदम पीछे हटा और तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं किसी इंसान से जा टकराया हूँ। फिर मैंने बिल्कुल अपने कान के पास गुर्राहट भरी आवाज़ सुनी। मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं एक झटके में पीछे मुड़ा। पर वहाँ कोई नहीं था। किसी को न पाकर मुझे बेहद हैरानी हुई। मैं दावे के साथ कह सकता था कि थोड़ी देर पहले जो मुझे किसी से टकराने की अनुभूति हुई थी, वह कहीं से भी मेरा भ्रम नहीं हो सकता था। अब-तक मुझे समझ में आ गया था कि मैंने यहाँ आकर बहुत बड़ी गलती कर दी थी। मेरे पास तब भी वहाँ से लौट जाने का समय था, मगर हमेशा की तरह मेरे उत्साह और रोमांच को पाने की इच्छा ने मुझे वहाँ रोके रखा।

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मैं थोड़ा हिम्मत समेटकर आगे बढ़ा। चाँद भी अब काले बादलों के पीछे जा छुपा था। फिर भी इतनी रोशनी तो थी ही कि मैं दो-चार कदम आगे तक देख सकता था। इस दौरान मेरे पैरों के नीचे से मिट्टी का खिसकना जारी रहा। मैंने जाँच-पड़ताल करनी चाही कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा था। मैं थोड़ा नीचे झुका और देखने की कोशिश की। मुझे देखकर हैरानी हुई कि वहाँ की मिट्टी अपने आप ही वहाँ बने क़ब्रों के नीचे जा रही थी। मुझे यह समझने में देर नहीं लगा कि भला ऐसा क्यों हो रहा था। क्योंकि मैं जिस कब्र के पास रुका था, उसमें से मुझे किसी के हाथ बाहर निकलते हुए नजर आए। फिर जल्द ही उस कब्र में लेटे हुए इंसान का पूरा शरीर बाहर निकल आया। अब मेरे पैरों के नीचे से मिट्टी का खिसकना बंद हो चुका था। मैंने देखा कि वे सारी मिट्टी उस मरे हुए इंसान के नीचे जमा होकर उसे कब्र से बाहर निकाल लाई थीं। यह सच में हैरतअंगेज दृश्य था। पर मुझे इससे ज्यादा हैरतअंगेज दृश्य का आभास तब हुआ, जब मेरी नजर उस मृत शरीर पर पड़ी। उसके शरीर का विघटन तो अभी शुरू भी नहीं हुआ था और वह इतना ताज़ा लग रहा था कि जैसे दो या तीन घंटे पहले ही मरा हो। हाँ उसके शरीर पर जगह-जगह कटने और चोटों के निशान जरूर थे, जो मुझे उस क्रूर राजा से हुए युद्ध की याद दिला रहा था।

जब चाँद बादलों के पीछे से बाहर आया तो अचानक ही उन चोटों और ज़ख्मों से लाल खून बाहर निकलने लगा। यह सचमें जादुई अनुभव था, जो मैं डर की वजह से उस वक्त महसूस नहीं कर पा रहा था। फिर अगले ही पल उस मृत इंसान ने अपनी आँखें खोल दीं। उस वक्त मैं इतना डर गया था कि मैं कोई भी प्रतिक्रिया नहीं कर पाया। इतना वक्त काफी था उस अनुप्राणित शव के लिए। उसने एक झटके में मेरे गर्दन को धर-दबोचा और उसे दबाता गया। मैंने छुड़ाने की बहुत कोशिशें की, मगर उसकी ताकत के सामने मेरे सारे प्रयास व्यर्थ रहे। मैं मर रहा था। मेरी सांसे रूकने लगी थी और मेरी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था। फिर कुछ ही क्षणों में मेरे गले पर पड़ रहे उस प्रेत के हाथों के भारी दबाव को सहना और भी मुश्किल हो गया। मैं बेहोश हो चुका था या शायद मर चुका था।

कभी-कभी मौत इतनी जल्दी और इतनी सरलता के साथ मिल जाती है कि हमें उससे ज्यादा डरने का मौका भी नहीं मिल पाता। यह एक अच्छी बात है। शायद हमने भूतों-प्रेतों को यूँ ही बदनाम कर रखा है। कभी-कभी वे भी हमें सरलता के साथ, बिना डराए मार डालते हैं या फिर मौत के समय भूतों का डर भी फीका पड़ जाता है। मैं यह कह सकता हूँ क्योंकि मैंने स्वयं इसका अनुभव किया है।

अगले दिन मेरी आँख खुली तो मैंने खुद को अस्पताल में पाया। सुरक्षाबल और थेम पार्क के कुछ अधिकारी भी वहाँ थें। उनसे मुझे कुछ और ही कहानी सुनने को मिली। मैंने जैसा अनुभव किया था, उससे बिल्कुल अलग। थेम पार्क के सुरक्षाबलों ने बताया कि गश्त लगाने के दौरान उन्होंने मुझे ब्लडफॉल ग्रेव्यार्ड में देखा। मैंने अपना ही गर्दन दबा रखा था। मानो मैं आत्महत्या कर रहा था। कुछ सवाल-जवाब के बाद उन्होंने मुझे जाने दिया। मगर सच्चाई क्या थी यह सिर्फ मैं जानता था और वह सुरक्षाबल जिसने मुझे पिछली रात थेम पार्क में देखा था। उसने जाते-जाते मेरे कानों में कहा कि मैंने न सिर्फ अपने गर्दन को दबा को रखा था, बल्कि मेरा पूरा शरीर हवा में लटका हुआ था। जब्कि वहाँ उसने मेरे अलावा और किसी को भी नहीं देखा था। यह दृश्य उन्हें थेम पार्क की उन भयानक कहानियों पर भरोसा दिलाने के लिए काफी था।

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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