भोंदूमल बंदर की अक्लमंदी

एक समय की बात है, दूर जंगल में बंदरों का झुंड रहा करता था। सभी बंदर बेहद अक्लमंद और चालाक थें। सिवाय एक के जो कि थोड़ा मंदबुद्धि का था। दूसरे बंदर उसे भोंदूमल कहकर पुकारा करते थे। जहाँ दूसरे बंदर पेड़ो पर कलाबाज़ियाँ करने में माहिर थें वहीं भोंदूमल बड़ी मुश्किल से एक डाल से दूसरे डाल पर पहुँच पाता था। यह देखकर दूसरे बंदर उसका मज़ाक भी उड़ाया करते थें। उस जंगल में अक्सर एक शिकारी आया करता था। जो कि बंदरों को पकड़कर मदारियों को बेच दिया करता था। इसलिए दूसरे बंदर भोंदूमल से दोस्ती नहीं करना चाहते थे। क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि भोंदूमल के मंदगति के कारण कहीं वे शिकारी उन्हें भी न पकड़ ले जाए। अगर वे भोंदूमल से दोस्ती करते हैं, तो उन्हें उसे बचाने के लिए रूकना पड़ेगा और वे शिकारी भोंदूमल के साथ उन्हें भी पकड़कर ले जाएगा। जिसकी वजह से भोंदूमल अकेला ही रहा करता था।

एक दिन भोंदूमल ने एक सियार को पेड़ के नीचे आराम करते देखा। चूंकि उसके साथ कोई भी दूसरा बंदर बात करना नहीं चाहता था, इसलिए वह अपना अकेलापन मिटाने के लिए उस सियार से बात करने के लिए पहुँचा। कुछ ही देर में दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई। फिर हर रोज वह सियार उस बंदर से मिलने आता और उससे घंटों बातें किया करता था। भोंदूमल बंदर उसे पेड़ से तोड़कर फल खाने को देता, जिससे उनकी मित्रता और प्रबल हो गई। एक रोज सियार ने भोंदूमल से पूछा कि वह बाकी बंदरों के साथ क्यों नहीं घूमता? तब भोंदूमल ने उसे अपनी व्यथा सुनाई। जिसे सुनने के बाद सियार ने कहा –

“सभी प्राणी एक जैसे नहीं होते। कुछ बेहद ताक़तवर होते हैं, तो कुछ कमजोर! कुछ बेहद तेज होते हैं तो कुछ मंद होते है। इसलिए अपनी तुलना कभी किसी दूसरे से नहीं करनी चाहिए। अपनी शक्तियों पर विश्वास रखकर, उनपर ही काम करना चाहिए और उन्हें और शक्तिशाली बनाने की कोशिश करनी चाहिए।”

‘पर मुझमें तो ऐसी कोई शक्ति नहीं है।’ भोंदूमल ने सियार से कहा।

‘तुम मेरे लिए पेड़ की सबसे ऊँची डाल से फल तोड़कर लाया करते हो। मगर मैं ऐसा नहीं कर सकता। इतनी ऊँचाई से नीचे देखकर मेरे प्राण ही सूख जाए। तो क्या मैं इसे अपनी कमज़ोरी मानकर ऐसा समझ लूँ कि मैं कुछ भी करने लायक नहीं रहा। मेरे पास और भी बहुत सी ऐसी ख़ूबियाँ हैं जिनपर काम करके मैं उन्हें और निखार सकता हूँ और एक सफल शिकारी बन सकता हूँ। बस जरूरत है तो तुम्हें अपनी उन खूबियों को पहचानना आना चाहिए। अगर तुम एक काम ढंग से नहीं कर सकते, तो इसका मतलब यह तो नहीं कि तुम दूसरे कामों को भी अच्छी तरह से न कर सको।’ यह बोलकर वह सियार वहाँ से चला गया और फिर कभी नहीं लौटा।

एक रात जब सभी बंदर गहरी नींद में थें, तब भोंदूमल पेड़ पर लेटा-लेटा अपनी खूबियों के बारे में सोचता रहा। पर उसे अपने भीतर कमियों के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। तभी उसने लकड़ियों के चटकने की आवाज़ सुनी। उसने देखा कि एक शिकारी धीरे-धीरे पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था। भोंदूमल को यह समझने में जरा भी देर नहीं लगी कि यह वही शिकारी था, जो बंदरों को पकड़कर बेच दिया करता था। भोंदूमल ने बिना कोई आवाज़ किये सभी बंदरों के पास जाकर उन्हें जगाया और उन्हें उस शिकारी के आ जाने की खबर दी। जल्दी ही सभी बंदरों को पता चला कि उन्हें पकड़ने दर्जन भर शिकारी आए थें और किसे पता था कि भला शिकारियों ने कौन-कौन पेड़ पर अपने जाल बिछाए थे। इस बात में कोई गुंजाइश नहीं थी कि आज की रात कुछ बंदरों का पकड़ा जाना तय था। ऐसे में जब किसी भी बंदर को कुछ न सूझ‍ा, तब भोंदूमल ने उन्हें पेड़ की सबसे ऊँची डाल पे जाने की सलाह दी। वहाँ की टहनियाँ पतली थी और वह शिकारियों का बोझ नहीं झेल सकती थी। सभी बंदरों ने इधर-उधर भागने के बजाय, वैसा ही किया जैसा भोंदूमल बंदर ने उन्हें सुझाया था। कुछ देर हो गई और जब बंदरों के भागने की अफरातफरी न हुई, तो सभी शिकारी परेशान हो उठे और पेड़ो पर चढ़ना शुरू कर दिया। भोंदूमल ने सभी बंदरों को धीरज बना कर बैठे रहने को कहा और वे पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर चुपचाप बैठे रहे। फिर एक शिकारी पेड़ पर चढ़ता हुआ जैसे ही सबसे ऊँची डाली की तरफ बढ़ा और उसपर अपने पांव रखे, तभी चटाक की आवाज़ के साथ वह टहनी टूट गई और वह शिकारी पेड़ से टकराता हुआ सीधा ज़मीन पर जा गिरा। थोड़ी देर बाद अन्य शिकारियों के साथ भी ऐसा ही हुआ। जब आधे दर्जन शिकारी पेड़ से नीचे गिरकर जख़्मी हो गए, तब उन्हें बंदरों की सूझ-बूझ का एहसास हुआ। और वे सभी लौट गए।

जब सुबह हुई तब बंदरों ने देखा कि शिकारियों ने अलग-अलग पेड़ो पर किस तरह से जाल बिछाए थें। उनकी योजना थी कि बंदरों को भगाकर उस पेड़ तक ले जाए और उन्हें जाल में फँसा दें। मगर भोंदूमल की चालाकी के कारण सभी बंदर सुरक्षित बच गए थे। सभी बंदरों ने भोंदूमल को धन्यवाद कहा और अपने बर्ताव के लिए उससे माफी भी मांगी और अब कोई भी उसे झुंड में पीछे छोड़कर नहीं घूमा करता था।

भोंदूमल ने मन ही मन उस सियार को धन्यवाद कहा, जिसने उसे अपने आप पर भरोसा रखना सिखाया था। उसे अपनी खूबियों का एहसास हो चुका था। वह जान गया था कि उसके भीतर कठिन समय में भी धीरज बनाकर अच्छे फैसले लेने की शक्ति थी, जो कि उसे बाकी बंदरों से बेहतर बनाती थी।

निष्कर्ष:

“एक सफल इंसान बनने के लिए अपने आप पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है। दूसरों की शक्तियों से अपनी तुलना करने से कुछ हासिल नहीं होता। इससे तो सिर्फ आपका मनोबल नीचे गिरता है। बजाय इसके हमारा मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि हम अपनी शक्तियों को पहचाने और उसे और निखारे। कई बार हम कठिन समय में ही अपनी छुपी हुई शक्तियों को पहचान पाते है।”

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Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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3 Responses

  1. Poonam says:

    Very inspirational story

  2. MJ says:

    Believe in myself is the most difficult thing … great story, thank you.

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