8. डोरम की गुफा

“जूलियट जल्दी ही पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने वाली है।” मैंने जब यह बात बैनी और उनकी बहू पूजा को बताई, तो उन दोनों के चेहरे पर मुस्कान खेल गई। आज सुबह से ही दिन कुछ खुशनुमा लग रहा था। नेमो एक के बाद एक हमें मजेदार चुटकुले सुनाता जा रहा था। जिससे हम सभी के लिए अपनी हंसी रोक पाना मुश्किल हो गया था। फिर मिस माँरफीन ने बेहद लज़ीज़ ब्रेकफ़ास्ट बनाया। जिसे खाकर सभी अपनी उँगलियाँ चाटते रह गए। पर मैं इससे वंचित रहा। मेरे प्रेत बन जाने की वजह से मैं कुछ भी खा नहीं सकता था। हालांकि कुछ प्रेत भोजन करने और स्वाद चखने के काबिल थें, मगर मैं ऐसा कर पाने में अब-तक असमर्थ था। वैसे रेडनोज और कैथी ने मुझसे वादा किया था कि वे जल्दी ही मेरी मुलाकात अन्य प्रेतों से करवाएंगे और मुझे भोजन करने की कला भी सीखाएंगे। मुझे उस दिन का बेसब्री से इंतजार था। कुल मिला कर देखा जाए तो आज का दिन यूँ ही बेहद शांति के साथ गुजर जाने वाला था। कम से कम आज के दिन हमें किसी भी तरह के रोमांच से बचे रहने की पूरी उम्मीद थी। और फिर दोपहर होते-होते, दरवाज़े पर दस्तक हुई-

बैनी सारस ने दरवाज़ा खोला और स्वागत कक्ष में धड़धड़ाते हुए एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति दाखिल हुआ। मैंने उन्हें पहली नजर में ही पहचान लिया। वे मिस्टर डेलिन थें। जो कुछ दिनों पहले हमारे घर भी आए थें। वे सात महत्वपूर्ण अतिथियों में से एक थें। खैर मिस्टर डेलिन कुछ घबड़ाए हुए लग रहे थें। उनके चेहरे को देखकर यह बात समझ में आ रही थी। उन्होंने घबड़ाई हुई आवाज़ में पूछा – ‘मिस टोलस्काइ कहाँ हैं? उन्हें जल्दी बुलाओ, मुझे उनसे बात करनी है।’

‘मिस स्काइ तो यहाँ किसी कारण से नहीं हैं। आप जो कहना चाहते हैं मुझसे कह सकते हैं।’ मिस माँरफीन ने कहा। वे उस वक्त स्वागत कक्ष में ही मौजूद थीं।

मिस्टर डेलिन थोड़ा हिचकिचाए और फिर अपने माथे पर आए पसीने को पोछते हुए बोले ‘बहुत बड़ी समस्या आ धमकी है। कुछ बहुत बुरा होने वाला है। आपको जल्द से जल्द मिस स्काइ तक यह खबर पहुँचानी होगी।’

‘क्या बुरा होने वाला है? आप मुझे खुलकर बताइए।’ मिस माँरफीन ने कहा।

‘बात यह है कि मैं पिछले कुछ दिनों से डोरम के जंगलों में जड़ी-बूटी के तलाश में भटक रहा था। मैं उस जंगल के काफी अंदर जा पहुँचा था। और फिर मुझे डोरम की गुफा नजर आई।’

‘डोरम की गुफा!’

एक साथ मिस माँरफीन, नेमो और पोबी समेत उसकी चार सहेली बोल पड़ीं। उन सभी के चेहरों पर एक जैसे हैरानी भरे भाव थें।

‘महाशय डेलिन! क्या आपको पूरा यकीन है कि आपने डोरम की ही गुफा देखी है। आपने उसे पहचाना कैसे? उसे मिस स्काइ के अलावा कोई दूसरा तो देख ही नहीं सकता।’ मिस माँरफीन ने कहा।

‘कैसी बातें कर रहीं हैं मैड़म माँरफीन! डोरम के जंगलों में कभी कोई गुफा था ही नहीं। सिवाय एक के, जिसे सिर्फ मिस स्काइ ही देख सकती हैं। और अब-तक हम सभी के लिए तो वह गुफा बस एक काल्पनिक कहानी से बढ़कर कुछ भी नहीं था। पर उस दिन मैंने उस अंधेरी भयानक गुफा को देखा। पर मेरी चिंता का कारण यह नहीं है कि मैंने उस गुफा को देखा था। मेरी चिंता का कारण तो कुछ और ही है।’ मिस्टर डेलिन ने एक बार फिर से अपने माथे पर आए पसीने को पोछते हुए कहा।

‘क्या देखा आपने?’ मिस माँरफीन ने पूछा।

मिस्टर डेलिन ने काँपती हुई आवाज़ में कहा ‘जब मैं उस गुफा की ओर बढ़ा, तब मैंने देखा कि उसके भीतर बहुत से प्रेतों-आत्माएं मौजूद थीं। और वहाँ कुछ और भी था।’

मैंने देखा कि मिस्टर डेलिन का पूरा शरीर बुरी तरह से कांप उठा। फिर उन्होंने आगे कहा ‘वह प्राणी जो कुछ भी था, वह उन प्रेतों को अपने कब्ज़े में कर रहा था, और जो भी उसका विरोध करता वह उसे मार डालता। आप समझ रही हैं ना मिस माँरफीन मैं क्या कहना चाहता हूँ! वह मरे हुए को फिर से मार रहा था।’

यह सुनकर तो मेरे भी रोंगटे खड़े हो गए। ‘भला कोई मरे हुए को कैसे मार सकता है?’ मैं अपने आप ही बोल पड़ा।

‘मिस माँरफीन क्या आप उस प्राणी के बारे में कुछ जानती हैं?’ मिस्टर डेलिन ने पूछा।

‘गौड्रिल!’ मिस माँरफीन ने कहा। ‘वे आत्माओं को भी मार सकते हैं।’

‘मगर वे ऐसा क्यों कर रहे है?’ बैनी सारस ने पूछा।

‘गौड्रिल और उनकी रानी जूना वारिच ने युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है। वे हमसे लड़ने के लिए आत्माओं की फौज तैयार कर रहे हैं। अब हमें भी देर नहीं करनी चाहिए। मिस्टर डेलिन क्या आप हमें उस जगह तक ले कर जा सकते हैं?’ मिस माँरफीन ने पूछा।

‘क्यों नहीं।’ मिस्टर डेलिन ऊँचे स्वर में बोले।

‘तो ठीक है। हम अभी चलते हैं। हमें उन आत्माओं को गौड्रिल के चंगुल से आज़ाद करना ही होगा। और यह भी तो पता करना है कि आखिर उन गौड्रिलों ने डोरम की गुफा का पता कैसे लगाया।’

जारी है…

Ritu Raj

मेरा नाम ॠतु राज है और मैं आपका Magical Hindi Stories में स्वागत करता हूँ। मेरी कोशिश आप सभी पाठकों तक ऐसी नई और रोचक हिंदी कहानियाँ पहुँचाने की है, जिन्हें आप अवश्य पढ़ना चाहेंगे।

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